PMGSY में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा, हरदुआ-खोहरी मार्ग पर नियमों को रौंदकर डाली जा रही नदी की बजरी
कटनी ब्यूरो। ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूत और बारहमासी सड़कों से जोड़ने का दावा करने वाली 'प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना' (PMGSY) भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ताजा मामला हरदुआ से खोहरी मार्ग का है, जहां ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की जुगलबंदी ने निर्माण कार्य के सारे मापदंडों को ताक पर रख दिया है। विकास के नाम पर सरकारी बजट को किस तरह ठिकाने लगाया जा रहा है, यह इस मार्ग पर चल रहे घटिया निर्माण को देखकर साफ समझा जा सकता है।
बेस में मुरम गायब, नदी की रेतीली बजरी से हो रही 'फिलिंग'
नियमों के मुताबिक, PMGSY सड़कों के बेस और सब-बेस निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता की मुरम और बोल्डर का इस्तेमाल होना अनिवार्य है ताकि सड़क भारी वाहनों का दबाव झेल सके। लेकिन हरदुआ से खोहरी मार्ग पर ईमानदारी को ताक पर रखकर नदी की पूरी बजरी (रेतीली मिट्टी और बारीक कंकड़) डालकर फिलिंग कराई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है: नदी की बजरी में बाइंडिंग (पकड़) की क्षमता नहीं होती। पहली ही तेज बारिश में यह बजरी पानी के साथ बह जाएगी या नीचे धंस जाएगी, जिससे करोड़ों की लागत से बनने वाली यह सड़क चंद महीनों में ही गड्डों में तब्दील होना तय है।
पत्थर की जुड़ाई में भी भारी खेल, तकनीकी मापदंड गायब
सड़क के किनारों और सुरक्षा दीवारों के लिए की जा रही पत्थर की जुड़ाई (Stone Pitching/Masonry) में भी जमकर धांधली हो रही है। सीमेंट और रेत के तय अनुपात को दरकिनार कर केवल कोरम पूरा किया जा रहा है। गुणवत्ता विहीन पत्थरों की बिना किसी उचित बेस के सीधे जुड़ाई की जा रही है, जो किसी भी वक्त ढह सकती है। यह न सिर्फ सरकारी पैसे की बर्बादी है, बल्कि आने वाले समय में इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों की जान के साथ भी खिलवाड़ है।
जिम्मेदार अधिकारियों की 'रहस्यमयी' खामोशी
इतने बड़े पैमाने पर हो रहे इस घटिया निर्माण ने विभाग के सब-इंजीनियर, ईई और क्वालिटी मॉनिटर्स की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि काम की शुरुआत से ही लापरवाही बरती जा रही है, लेकिन कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर आकर जांच करने को तैयार नहीं है। ऐसा लगता है कि ठेकेदार को अधिकारियों का मूक संरक्षण प्राप्त है।
जनता की मांग: उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर हो कार्रवाई
हरदुआ और खोहरी के ग्रामीणों में इस घटिया निर्माण को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे मार्ग के निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगाई जाए और उच्च स्तरीय तकनीकी टीम भेजकर डाली गई बजरी और पत्थर की जुड़ाई की जांच की जाए। अगर समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।


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