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उज्ज्वला लाभार्थियों को बड़ा झटका: अब साल में 9 नहीं, सिर्फ 4 सिलेंडर पर ही मिलेगी सब्सिडी
कटनी | सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला किया है। नए आदेश के मुताबिक, अब उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या को सालाना 9 से घटाकर मात्र 4 कर दिया गया है। इस फैसले के बाद अब गरीब परिवारों को साल में केवल चार सिलेंडरों पर ही सरकार की ओर से तय सब्सिडी मिलेगी। इसके बाद के सभी सिलेंडर लाभार्थियों को बाजार मूल्य (बिना सब्सिडी के) पर ही खरीदने होंगे।
क्या है नया नियम और क्यों लिया गया फैसला?
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस कदम के पीछे का मुख्य उद्देश्य सब्सिडी के बजट को नियंत्रित करना और योजना में होने वाले संभावित दुरुपयोग को रोकना है। सरकार का मानना है कि कई ग्रामीण और गरीब परिवारों में साल भर में औसतन 4 से 5 सिलेंडरों की ही खपत होती है। हालांकि, सरकार के इस तर्क के उलट, इस फैसले का सीधा असर उन बड़े परिवारों पर पड़ेगा जिनकी रसोई पूरी तरह एलपीजी (LPG) पर निर्भर है।
मुख्य बिंदु:
- पुरानी व्यवस्था: उज्ज्वला कार्डधारकों को एक वित्तीय वर्ष में 9 सिलेंडरों पर सब्सिडी मिलती थी।
- नई व्यवस्था: अब केवल शुरुआती 4 सिलेंडरों पर ही सब्सिडी का लाभ मिलेगा।
- अतिरिक्त बोझ: 5वां सिलेंडर लेते ही उपभोक्ता को पूरी बाजार कीमत चुकानी होगी।
आम जनता और विपक्ष में नाराजगी
इस फैसले की खबर आते ही जमीन पर इसका विरोध शुरू हो गया है। कई महिला लाभार्थियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में 4 सिलेंडर के बाद पूरा दाम चुकाना उनके घरेलू बजट को पूरी तरह बिगाड़ देगा।
स्थानीय निवासी सुमित्रा देवी ने कहा, "चार सिलेंडर तो छह-सात महीने में ही खत्म हो जाते हैं। बाकी के महीनों में क्या हम फिर से चूल्हा फूंकने पर मजबूर होंगे? सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।"
वहीं, विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार पहले तो मुफ्त कनेक्शन देकर वाहवाही लूटती है और बाद में चुपके से सब्सिडी में कटौती करके गरीबों की जेब पर डाका डालती है।
क्या बढ़ेगी लकड़ी और कोयले पर निर्भरता?
जानकारों का मानना है कि सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या घटने से ग्रामीण इलाकों में लोग एक बार फिर पारंपरिक ईंधन (लकड़ी, उपले) की तरफ रुख कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो उज्ज्वला योजना का मूल उद्देश्य—यानी महिलाओं को धुएं से मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण—कमजोर पड़ सकता है।
फिलहाल, यह देखना बाकी है कि क्या चौतरफा दबाव के बाद सरकार इस फैसले में कोई ढील देती है या गरीब परिवारों को इसी नई व्यवस्था के साथ तालमेल बिठाना होगा।

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