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एमपी में कब खुलेगा लाडली बहना पोर्टल? लाखों बहनें पूछ रहीं सवाल— क्या हम सरकार की लाडली नहीं?

विशेष 

मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित और लोकप्रिय 'मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना' को लेकर प्रदेश की लाखों महिलाओं का सब्र अब जवाब देने लगा है। एक तरफ जहां हर महीने की तारीख आते ही करोड़ों बहनों के खातों में खुशियों की किस्त (1250 रुपये) ट्रांसफर हो जाती है, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश की लाखों पात्र महिलाएं आज भी इस योजना के दायरे से बाहर हैं। वजह? पिछले कई महीनों से लाडली बहना योजना का रजिस्ट्रेशन पोर्टल बंद पड़ा है।

​अब प्रदेश के कोने-कोने से आवाज उठने लगी है और सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव पर 'भेदभाव' के आरोप लग रहे हैं।

लाखों बहनों का सवाल: क्या हमारे साथ हो रहा सौतेला व्यवहार?

​योजना का लाभ लेने से चूकी महिलाओं का दर्द अब गुस्से में बदल रहा है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर से लेकर बुंदेलखंड और महाकौशल के ग्रामीण अंचलों तक से एक ही आवाज आ रही है। बहनों का पूछना है:

​"जिन्हें पैसा मिल रहा है, क्या सिर्फ वही सरकार की लाडली हैं? जो बहनें किसी कारणवश पहले चरण में फॉर्म नहीं भर पाईं या जो अब 21 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी हैं, क्या वे प्रदेश की बेटियां नहीं हैं? हमारे साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों?"


मोहन यादव सरकार पर क्यों लग रहे हैं भेदभाव के आरोप?

​चुनावी दौर में भाजपा ने वादा किया था कि यह योजना सतत चलती रहेगी और छूटे हुए नामों को जोड़ने के लिए पोर्टल फिर से खोला जाएगा। लेकिन सरकार बने लंबा समय बीत जाने के बाद भी पोर्टल नहीं खोला गया। विपक्ष और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि सरकार बजट की कमी के चलते जानबूझकर पोर्टल नहीं खोल रही है।

नाराजगी के मुख्य कारण:

  • उम्र का दायरा: कई युवतियां जो हाल ही में 21 वर्ष की हुई हैं, वे पोर्टल खुलने का इंतजार कर रही हैं।
  • विवाहित महिलाएं: जिन युवतियों की शादी हाल-फिलहाल में हुई है और वे अब इस योजना के लिए पूरी तरह पात्र हैं, वे फॉर्म नहीं जमा कर पा रही हैं।
  • तकनीकी खामी से छूटीं बहनें: पहले और दूसरे चरण में डाक्यूमेंट्स मिसमैच होने के कारण जिन महिलाओं के फॉर्म रिजेक्ट हुए थे, वे सुधार के मौके का इंतजार कर रही हैं।

क्या कहती है सरकार?

​सूत्रों की मानें तो महिला एवं बाल विकास विभाग इस मामले पर लगातार समीक्षा कर रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव कई मंचों से स्पष्ट कर चुके हैं कि "लाडली बहना योजना" बंद नहीं होगी और हर महीने बिना रुके पैसा दिया जाएगा। हालांकि, नया रजिस्ट्रेशन पोर्टल कब खुलेगा, इस पर सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक तारीख (Dead Line) घोषित नहीं की गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बजट आवंटन और डेटा अपग्रेडेशन की प्रक्रिया पूरी होते ही इस पर फैसला लिया जाएगा।

 उम्मीद और इंतजार की सीमा

​सरकार भले ही हर महीने पैसे डालने का रिकॉर्ड बना रही हो, लेकिन जब तक पोर्टल दोबारा नहीं खुलता, तब तक 'भेदभाव' और 'सौतेले व्यवहार' के ये आरोप शांत होने वाले नहीं हैं। मध्य प्रदेश की लाखों वंचित बहनें आज भी टकटकी लगाए बैठी हैं कि कब मोहन यादव सरकार का दिल पिघलेगा और कब उन्हें भी 'लाडली' होने का हक मिलेगा।

[आपकी राय: क्या सरकार को तुरंत खोलना चाहिए पोर्टल? हमें नीचे कमेंट बॉक्स या पत्र के माध्यम से बताएं।]

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