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 वादों की दहलीज पर टिकी निगाहें; कब खुलेगा लाडली बहना का पोर्टल?

मध्य प्रदेश की 'लाडली बहना योजना' ने प्रदेश की करोड़ों महिलाओं के जीवन में आर्थिक संबल तो दिया है, लेकिन इसका दूसरा पहलू आज भी अंधकार में है। प्रदेश की लाखों वैसी बहनें, जो पहले और दूसरे चरण में किसी कारणवश आवेदन नहीं कर पाई थीं, आज भी पोर्टल दोबारा खुलने की राह देख रही हैं। सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या शासन के पास बजट की कमी है या फिर नई पात्रता का पेच?

लाखों बहनों का अधूरा इंतज़ार

​योजना के शुरू होते समय यह उम्मीद जगाई गई थी कि कोई भी पात्र महिला लाभ से वंचित नहीं रहेगी। वर्तमान में लगभग 1.29 करोड़ महिलाओं को हर महीने राशि मिल रही है। हालांकि, हजारों ऐसी विवाहित महिलाएं हैं जिनकी उम्र हाल ही में 21 वर्ष हुई है या जो पिछली बार तकनीकी कारणों (KYC या बैंक लिंक न होना) से चूक गई थीं। इन 'छूटी हुई' बहनों के लिए पोर्टल का बंद होना किसी सजा से कम नहीं है।

क्या बजट की कमी है असली वजह?

​सूत्रों की मानें तो वर्तमान में सरकार पर वित्तीय भार काफी अधिक है। हाल ही में लाडली बहना की राशि को ₹1250 से बढ़ाकर ₹1500 किया गया है।

  • वित्तीय गणित: इस वृद्धि के बाद सरकार का वार्षिक खर्च अब 20,000 करोड़ रुपये के पार जाने का अनुमान है।
  • ​जानकारों का कहना है कि नए नाम जोड़ने का मतलब है खजाने पर हर महीने सैकड़ों करोड़ का अतिरिक्त बोझ। शायद यही वजह है कि शासन पोर्टल खोलने के बजाय वर्तमान लाभार्थियों को ही साधने में जुटा है।

कोर्ट तक पहुँचा मामला

​हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में पोर्टल दोबारा खोलने को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया कि योजना को जारी रखना या नए पंजीकरण शुरू करना पूरी तरह से 'नीतिगत निर्णय' (Policy Decision) है, जिसमें न्यायपालिका हस्तक्षेप नहीं कर सकती। अब गेंद पूरी तरह से सरकार के पाले में है।

बहनों की मांग: 'हमें भी मिले सम्मान'

​ग्रामीण इलाकों से आई महिलाओं का कहना है, "सरकार कहती है कि लाडली बहना उनकी प्राथमिकता है, लेकिन क्या हम उनकी बहनें नहीं हैं? यदि योजना जारी है, तो नए पात्र लोगों के लिए रास्ता क्यों बंद है?"

निष्कर्ष:

चुनावी वादे के मुताबिक राशि को ₹3000 तक ले जाने का लक्ष्य तो है, लेकिन बिना नए पंजीकरण के, 'सबका साथ' का दावा अधूरा नजर आता है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव आगामी कैबिनेट बैठकों में इन 'उपेक्षित' बहनों के लिए पोर्टल के ताले खोलते हैं या इन्हें अभी और लंबा इंतज़ार करना होगा।

मुख्य बिंदु 

  • वर्तमान लाभार्थी: 1.29 करोड़ लगभग।
  • बजट 2025-26: संभावित व्यय ₹20,450 करोड़ से अधिक।
  • प्रमुख मांग: 21 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी नई विवाहित महिलाओं को जोड़ा जाए।
  • पोर्टल स्थिति: अगस्त 2023 के बाद से नए पंजीकरण बंद।

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