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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता राजस्व विभाग: पटवारी पर ₹20,000 की रिश्वत मांगने का आरोप
                                                रवी शंकर पांडे(शिकायत कर्ता)

 ​रिश्वत न देने पर गलत प्रतिवेदन बनाकर केस खारिज करने का दावा, देवडोगरा निवासी रविशंकर पांडे ने खोला मोर्चा

कटनी 

एक तरफ सरकार जहां प्रशासन को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर राजस्व विभाग की छवि लगातार धूमिल होती जा रही है। ताजा मामला ग्राम पंचायत देवडोगरा का है, जहां एक पीड़ित किसान ने पटवारी पर खुलेआम रिश्वत मांगने और पैसे न देने पर उनका काम बिगाड़ने का गंभीर आरोप लगाया है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने अब प्रशासनिक संरक्षण और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला क्या है? (पीड़ित की जुबानी)

​ग्राम पंचायत देवडोगरा के निवासी रविशंकर पांडे ने क्षेत्र के पटवारी राहुल गौतम पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। रविशंकर पांडे का कहना है कि खसरा नंबर 236 के बटानकन का एक मामला राजस्व विभाग में चल रहा था। इस मामले की जांच और प्रतिवेदन (रिपोर्ट) तैयार करने के एवज में पटवारी राहुल गौतम द्वारा ₹20,000 की रिश्वत की मांग की जा रही थी।

रविशंकर पांडे का आरोप: "मैंने पटवारी को रिश्वत देने से साफ मना कर दिया था। इसी बात की रंजिश रखते हुए पटवारी राहुल गौतम ने जानबूझकर एक गलत और भ्रामक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) तैयार कर उच्च अधिकारियों के सामने पेश कर दिया। नतीजा यह हुआ कि रिश्वत न देने के कारण मेरे बटानकन का पूरा केस ही रद्द (खारिज) हो गया।  


सवाल: आखिर राजस्व विभाग की छवि 'साफ-सुथरी' क्यों नहीं हो पा रही?

​यह कोई पहला मामला नहीं है जब किसी पटवारी या राजस्व कर्मी पर इस तरह के आरोप लगे हों। आए दिन प्रदेश के अलग-अलग कोनों से लोकायुक्त की कार्रवाई और रिश्वतखोरी के मामले सामने आते रहते हैं। इसके बावजूद धरातल पर कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है।

इसके पीछे मुख्य कारण क्या हैं?

  • प्रशासन की ढील और मूक सहमति: लगातार लगने वाले आरोपों के बाद भी दागी कर्मचारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई न होना, कहीं न कहीं ऊपरी प्रशासन की ढील या शह को दर्शाता है।
  • अधिकारियों का संरक्षण: अक्सर ऐसे मामलों में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं, जिससे भ्रष्ट कर्मियों के हौसले और बुलंद हो जाते हैं।
  • आम जनता की मजबूरी: जमीन की नपाई, नामांतरण और सीमांकन जैसे कामों के लिए आम जनता को मजबूरन पटवारियों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिसका फायदा ये भ्रष्ट अधिकारी उठाते हैं।

गंभीर जांच की दरकार

​रविशंकर पांडे द्वारा लगाए गए इन आरोपों ने एक बार फिर राजस्व विभाग के कामकाज को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यदि एक आम नागरिक को न्याय के लिए दलालों और रिश्वतखोरों के आगे घुटने टेकने पड़ेंगे, तो व्यवस्था पर से जनता का विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा।

​अब देखना यह होगा कि इस मामले की शिकायत के बाद वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पटवारी राहुल गौतम के खिलाफ निष्पक्ष जांच बैठाते हैं या फिर हर बार की तरह इस मामले को भी रफा-दफा कर दिया जाएगा।

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