नगर निगम की लापरवाही: नई सड़कों का जश्न, पुरानी राहों में बिछे मौत के जाल
कटनी। एक ओर नगर निगम शहर में नवीन सड़कों और विभिन्न विकास कार्यों के भूमि पूजन का उत्सव मना रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर की पुरानी और व्यस्त सड़कें अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। विकास के दावों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि शहर की प्रमुख सड़कें बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, जो आए दिन राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बन रही हैं।
सीवर लाइन बनी मुसीबत, वाहन हो रहे खराब
शहर के लगभग हर हिस्से में सीवर लाइन बिछाने के नाम पर सड़कों को खोदा गया, लेकिन कार्य पूर्ण होने के बाद उनकी उचित मरम्मत नहीं की गई। इसके परिणामस्वरूप सड़कों पर इतने गहरे गड्ढे हो गए हैं कि दोपहिया और चार पहिया वाहनों का निकलना दूभर हो गया है। इन गड्ढों के कारण न केवल वाहनों के कलपुर्जे समय से पहले खराब हो रहे हैं, बल्कि आए दिन छोटी-मोटी दुर्घटनाएं आम बात हो गई हैं।
नदी पार पुलिया पर टला बड़ा हादसा
नगर निगम की इस प्रशासनिक असफलता और लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण दो दिन पहले शाम के समय नदी पार क्षेत्र में देखने को मिला। यहाँ नाले की डायवर्सन पुलिया के बीचों-बीच बना एक गड्ढा जहां ढक्कन न होने के कारण एक भारी लोड लेकर जा रहा पिकअप वाहन बुरी तरह फंस गया। गनीमत रही कि उस वक्त कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ,उस वाहन को फिर क्रेन की सहायता से निकाला गया प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह चेंबर लंबे समय से क्षतिग्रस्त था, लेकिन निगम ने इसकी सुध नहीं ली।
जनता में भारी आक्रोश
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन केवल नए कार्यों का फीता काटने में व्यस्त है। जनता का सवाल है कि:
- आखिर पुराने गड्ढों को भरने के लिए बजट कब आवंटित होगा?
- सीवर लाइन के ठेकेदारों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही?
- क्या निगम प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है?
शहर की जनता अब मांग कर रही है कि फोटो खिंचवाने और भूमि पूजन करने से पहले उन गड्ढों को भरा जाए जो हर पल किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं। यदि जल्द ही इन सड़कों और चेंबरों की मरम्मत नहीं की गई, तो नागरिक सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
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