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पेट्रोल-डीजल की मार: माल-भाड़ा 25% तक बढ़ाने की तैयारी, बस किराए में भी बढ़ोतरी की मांग

विशेष

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी ने अब आम जनता की जेब पर चौतरफा हमला करने की तैयारी कर ली है। ईंधन के दामों में लगातार हो रहे इजाफे से परेशान ट्रांसपोर्टर्स ने माल-भाड़े (Freight Charges) में 20 से 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी करने का मन बना लिया है। दूसरी ओर, यात्री बसों के संचालकों ने भी सरकार से तुरंत बस किराया बढ़ाने की मांग की है। अगर ऐसा होता है, तो आने वाले दिनों में कमरतोड़ महंगाई का एक नया दौर शुरू होना तय है।

​थाली से लेकर तामझाम तक, सब होगा महंगा

​ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनों का कहना है कि डीजल की कीमतें बढ़ने से उनका परिचालन खर्च (Operating Cost) बजट से बाहर हो चुका है। माल-भाड़े में 25% तक की इस संभावित बढ़ोतरी का सीधा असर आपकी और हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा:

  • सब्जियां और राशन: बाहरी राज्यों से आने वाले फल, सब्जियां, दालें और अनाज महंगे हो जाएंगे।
  • मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर: कच्चा माल फैक्ट्री तक लाना और तैयार माल बाजार तक पहुंचाना महंगा होने से हर छोटी-बड़ी चीज की कीमतें बढ़ेंगी।
  • कन्स्ट्रक्शन मटीरियल: सीमेंट, सरिया, ईंट और रेत की ढुलाई महंगी होने से घर बनाना और खर्चीला हो जाएगा।

​'अब गाड़ियां खड़ी करने के अलावा कोई रास्ता नहीं'

"डीजल का दाम बढ़ने से हमारा मुनाफा तो दूर, गाड़ियों की किस्त निकालना भी मुश्किल हो गया है। टायर, स्पेयर पार्ट्स और टोल टैक्स पहले ही महंगे हैं। अगर हमने तुरंत माल-भाड़ा 20-25% नहीं बढ़ाया, तो पूरा ट्रांसपोर्ट सेक्टर ठप हो जाएगा।"

बस संचालक भी आर-पार के मूड में

​मालगाड़ियों के साथ-साथ यात्री बसों के पहिए भी अब महंगे ईंधन की वजह से डगमगाने लगे हैं। बस ऑपरेटरों का दावा है कि पिछले कुछ समय में डीजल के दाम जितने बढ़े हैं, उस अनुपात में टिकट की कीमतें नहीं बढ़ाई गईं।

बस संचालकों की प्रमुख मांगें:

  1. किराए में 30% तक की वृद्धि: राज्य सरकारों से तुरंत बस किराए की दरों में संशोधन (Revision) करने की मांग की गई है।
  2. टैक्स में छूट: जब तक कीमतें सामान्य नहीं होतीं, तब तक त्रैमासिक रोड टैक्स में राहत दी जाए।
  3. चेतावनी: बस यूनियनों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने जल्द ही किराए में बढ़ोतरी को मंजूरी नहीं दी, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने और बसों के चक्के जाम करने के लिए मजबूर होंगे।

    ​जनता पर पड़ेगा सीधा बोझ

    ​विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में इस रिकॉर्ड बढ़ोतरी का 'डोमिनो इफेक्ट' (एक के बाद एक असर) देखने को मिलेगा। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे मध्यम और निम्न वर्ग के लिए अब सफर करना और पेट भरना दोनों ही जेब पर भारी पड़ने वाला है। अब सबकी निगाहें सरकार के रुख पर टिकी हैं कि क्या टैक्स में कटौती कर जनता को कोई राहत दी जाती है या फिर महंगाई का यह नया बोझ उठाना ही होगा।

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