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हाईकोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखा रहा कटनी का राजस्व विभाग; स्कूल की बाउंड्री पर फिर तना 'अवैध' कब्जा
ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द में प्रशासन की लापरवाही से फिर खड़े हुए अतिक्रमण, जनपद की रिपोर्ट भी दरकिनार
कटनी | विशेष संवाददाता
कटनी का तहसील कार्यालय इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर कम और 'तमाशाबीन' बने रहने को लेकर ज्यादा चर्चा में है। मामला ग्राम पंचायत केलवाड़ा का है, जहाँ राजस्व विभाग की मेहरबानी के चलते कानून के राज की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। जिस शासकीय भूमि और स्कूल की बाउंड्री पर बने अतिक्रमण को माननीय उच्च न्यायालय ने अवैध मानते हुए तोड़ने का आदेश दिया था, वहां आज फिर से अवैध दुकानें खड़ी हो गई हैं। आश्चर्य की बात यह है कि तहसीलदार कार्यालय को न तो जनपद पंचायत के प्रतिवेदन की चिंता है और न ही ग्राम पंचायत की शिकायतों की।
पांच दुकानों पर चला था बुलडोजर, अब फिर 'आबाद'
पूरा मामला खसरा नंबर 326/2 और शासकीय माध्यमिक शाला की बाउंड्री से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, इन दुकानों को पूर्व में अवैध घोषित कर भारी पुलिस बल के साथ ढहाया गया था। लेकिन प्रशासन की 'सुस्ती' कहें या भू-माफियाओं से 'सांठगांठ', स्कूल की बाउंड्री से लगकर फिर से तीन दुकानें तन गई हैं। शिक्षा के मंदिर के पास इस तरह का व्यावसायिक अतिक्रमण प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
पंचायती राज की गरिमा ताक पर
लोकतंत्र में ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत की रिपोर्ट का विशेष महत्व होता है, लेकिन केलवाड़ा के मामले में तहसीलदार कार्यालय ने इन्हें रद्दी की टोकरी के हवाले कर दिया है। पंचायत द्वारा बार-बार दी जा रही शिकायतों के बावजूद राजस्व अमला मौके पर जाने की जहमत तक नहीं उठा रहा है।
"जब हाईकोर्ट के आदेश पर पूर्व में कार्रवाई हो चुकी है, तो दोबारा निर्माण होना सीधे तौर पर कोर्ट की अवमानना है। प्रशासन की चुप्पी समझ से परे है।"
— सरपंच कैलवारा खुर्द
प्रमुख सवाल: जिनके जवाब जनता चाहती है
- अवमानना क्यों?: हाईकोर्ट द्वारा अवैध घोषित दुकानों पर दोबारा कब्जा कैसे हो गया? क्या यह न्यायालय की सीधी अवमानना नहीं है?
- अनदेखी क्यों?: जनपद पंचायत कटनी के प्रतिवेदन को तहसीलदार कार्यालय आखिर क्यों ठंडे बस्ते में डाले हुए है?
- सांठगांठ या मजबूरी?: क्या राजस्व विभाग के अधिकारी किसी राजनैतिक दबाव में हैं या फिर पर्दे के पीछे कोई बड़ा 'लेन-देन' हुआ है?
संपादकीय टिप्पणी: सरकारी जमीन और स्कूल की सीमाओं पर अतिक्रमण होना विकास नहीं, बल्कि विनाश का प्रतीक है। यदि जिम्मेदार अधिकारी ही कोर्ट के आदेशों को 'तमाशा' समझेंगे, तो आम जनता का कानून से भरोसा उठना लाजमी है।
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