Chief editor-neeraj pandey
सूत्रों के हवाले से
'डिजिटल इंडिया' की आड़ में ग्रामीण जनता से 'लूट' की आशंका!
कटनी के रूरल एरिया में संचालित ग्राहक सेवा केंद्रों (CSP) पर उठे गंभीर सवाल, सूत्रों के हवाले से बड़ी अनियमितता की खबर
विशेष खोजी रिपोर्ट, कटनी
ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं को आसान बनाने के लिए शुरू किए गए ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) अब खुद संदेह के घेरे में हैं। सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के अनुसार, कटनी जिले के ग्रामीण इलाकों (रूरल एरिया) में धड़ल्ले से चल रहे कई ग्राहक सेवा केंद्रों में भारी अनियमितताएं और वित्तीय गड़बड़ियां की जा रही हैं। सीधे-सादे ग्रामीणों की गाढ़ी कमाई और सरकारी योजनाओं के पैसों पर कतिपय केंद्र संचालकों द्वारा डाका डाले जाने की आशंका गहरा गई है।
क्या है पूरा खेल? (सूत्रों के हवाले से संभावित गड़बड़ियां)
ग्रामीण क्षेत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, इन केंद्रों पर एक-दो नहीं बल्कि कई स्तरों पर खेल हो रहा है:
- अंगूठा लगवाकर ज्यादा पैसे निकालने का शक: सूत्रों का कहना है कि कई केंद्रों पर कम पढ़े-लिखे ग्रामीणों से लिंक फेल होने या सर्वर डाउन होने का बहाना बनाकर दो से तीन बार बायोमेट्रिक (अंगूठा) लगवा लिया जाता है। बाद में उनके खातों से चुपचाप अतिरिक्त रकम साफ कर दी जाती है।
- अवैध 'कमीशन' की वसूली: नियमों के मुताबिक, ग्राहक सेवा केंद्रों को बैंक की तरफ से कमीशन मिलता है और उन्हें ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेना होता। लेकिन रूरल एरिया में लाड़ली बहना योजना, किसान सम्मान निधि या वृद्धावस्था पेंशन की राशि निकालने के बदले 50 से 100 रुपये तक की अवैध कटौती या 'सर्विस चार्ज' वसूले जाने की शिकायतें आम हैं।
- पासबुक एंट्री और रसीद न देना: कई सेंटर्स पर लेनदेन के बाद न तो ग्राहकों को कोई पक्की कंप्यूटर जेनरेटेड रसीद दी जा रही है और न ही पासबुक में एंट्री की जा रही है। ऐसे में अनपढ़ ग्रामीणों को पता ही नहीं चल पाता कि उनके खाते से असल में कितनी रकम कटी है।
प्रशासन और लीड बैंक मैनेजर की भूमिका पर सवाल
यह पूरा गंदा खेल जिला प्रशासन और अग्रणी बैंक (Lead Bank) के जिम्मेदारों की नाक के नीचे चल रहा है। नियमों के अनुसार, इन केंद्रों की समय-समय पर औचक जांच (Surprise Inspection) होनी चाहिए, लेकिन कटनी के ग्रामीण इलाकों में ऐसा दूर-दूर तक नजर नहीं आता। अफसरों की इसी ढील का फायदा उठाकर कुछ केंद्र संचालक ग्रामीणों के खातों को अपनी जागीर समझ बैठे हैं।
बड़ा सवाल: क्या कटनी का बैंकिंग प्रशासन किसी बड़े वित्तीय घोटाले या किसी गरीब ग्रामीण द्वारा आत्मघाती कदम उठाने का इंतजार कर रहा है? रूरल एरिया के इन सेंटर्स का ऑडिट आखिर क्यों नहीं होता?
जनता की मांग: तुरंत हो 'स्पेशल ऑडिट'
कटनी के जागरूक नागरिकों और ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि:
- जिले के सभी रूरल एरिया के ग्राहक सेवा केंद्रों की सघन जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया जाए।
- पिछले 6 महीनों के दौरान इन केंद्रों से हुए ट्रांजैक्शन का फॉरेंसिक और टेक्निकल ऑडिट कराया जाए।
- जिन केंद्रों पर रसीद न देने या अवैध वसूली की शिकायत मिले, उनके लाइसेंस तुरंत निरस्त कर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।
ब्यूरो टिप्पणी: अगर समय रहते इन 'डिजिटल दुकानों' पर लगाम नहीं कसी गई, तो कटनी के ग्रामीण इलाकों में एक बड़ा बैंकिंग फ्रॉड सामने आ सकता है। रूरल एरिया के भोले-भाले किसानों और मजदूरों का भरोसा डिजिटल सिस्टम से उठने से पहले, प्रशासन को अपनी कुंभकर्णी नींद से जागना ही होगा।
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