Chief editor-neeraj pandey
किसान की आपबीती: "मैंने सिर्फ गेहूं नहीं, अपना आत्मसम्मान भी बेचा"
CWC कटनी में भ्रष्टाचार का नंगा नाच; 137 क्विंटल गेहूं बेचने के लिए किसान को देनी पड़ी ₹9,000 से ज्यादा की 'रिश्वत'
कटनी
"सुबह 11 बजे ट्रैक्टर लेकर पहुंचा था, रात 11 बजे खाली हाथ और टूटे मन से घर लौटा। दिन भर हाथ जोड़े, मिन्नतें कीं, नेताओं को फोन लगाए, लेकिन काम तभी हुआ जब जेब ढीली की।" यह मार्मिक शब्द ग्राम खोहरी के किसान शशिकांत पटेल के हैं, जिन्होंने सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन (CWC) कटनी में गेहूं खरीदी के दौरान हुए शोषण की पूरी कहानी सोशल मीडिया और लिखित माध्यम से सार्वजनिक की है।
सर्वेयर का 'छनना' खेल: मिट्टी के नाम पर मानसिक प्रताड़ना
शशिकांत के अनुसार, उनका गेहूं साफ था, लेकिन सर्वेयर ने इक्का-दुक्का मिट्टी का बहाना बनाकर गेहूं तुलाई से इनकार कर दिया। हैरान करने वाली बात यह रही कि जिनसे 'सांठगांठ' थी, उनका ज्यादा मिट्टी वाला गेहूं आसानी से तौला जा रहा था। दबाव बनाने के लिए किसान को शाम 5:30 बजे तक इंतजार कराया गया और अंत में जबरन छनना लगवाया गया, जिसमें किसान के अतिरिक्त ₹600 खर्च हुए।
भ्रष्टाचार की रेट लिस्ट: कदम-कदम पर वसूली
किसान ने अपनी आपबीती में उन सभी खर्चों का ब्यौरा दिया है, जो सरकारी सिस्टम की पोल खोलते हैं:
- सर्वेयर (पास करने के नाम पर): ₹700
- अंतिम कट्टा (₹50 प्रति क्विंटल): ₹6,875
- बोरी भरने वाली लेबर: ₹500
- कंप्यूटर ऑपरेटर: ₹200
- अन्य (बरदाना, सिलाई, काउंटिंग): ₹300
- तौल में 'डाका': प्रति बोरी 250 ग्राम ज्यादा गेहूं लिया गया, जिससे 137 क्विंटल पर लगभग 34 किलो गेहूं का अतिरिक्त नुकसान हुआ।
- केंद्र प्रभारी और सर्वेयर के कॉल डिटेल्स और उस दिन की गतिविधियों की जांच हो।
- किसानों से अतिरिक्त ली गई राशि वापस दिलाई जाए।
- 'छनना' और 'रिजेक्शन' के नाम पर होने वाली ब्लैकमेलिंग बंद हो।
"आज समझ आया कि वक्त पर नेता नहीं, पैसा काम आता है। मैंने विधायक, भाजपा जिलाध्यक्ष और मीडिया तक को फोन किया, लेकिन सिस्टम के आगे कोई काम नहीं आया।"
— शशिकांत पटेल, पीड़ित किसान
नेताओं के फोन भी रहे बेअसर
शशिकांत ने मदद के लिए क्षेत्रीय विधायक संदीप जायसवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक टंडन, और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं से संपर्क किया। लेकिन खरीदी केंद्र पर बैठे कर्मचारियों के हौसले इतने बुलंद थे कि किसी भी राजनीतिक रसूख का उन पर असर नहीं हुआ। अंततः रात 9 बजे तक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने के बाद ही किसान का गेहूं तौला गया।
सुनिये किसान की आपबीति
जांच की मांग: कब जागेगा प्रशासन?
यह मामला सिर्फ एक शशिकांत पटेल का नहीं है, बल्कि कटनी के खरीदी केंद्रों पर चल रहे एक बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा करता है। किसान ने प्रशासन से मांग की है कि CWC केंद्रों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच हो और इन अवैध वसूलियों पर रोक लगाई जाए।
मीडिया के माध्यम से मुख्य मांगें:
ब्यूरो रिपोर्ट: भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक किसान की आवाज़।
Comments
Post a Comment