हाईकोर्ट के आदेश पर भारी पड़ रही राजस्व विभाग की 'मूक सहमति'!
ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द में प्रशासन की नाक के नीचे तनी हैं अवैध दुकानें, साहबों को 'सब मालूम है' पर खबर नहीं
कटनी
न्यायालय का आदेश सर्वोपरि है... यह बात शायद देश के हर नागरिक पर लागू होती है, सिवाय कटनी जिले के राजस्व विभाग के कुछ मेहरबान अधिकारियों के! कटनी जिले के ग्राम पंचायत केलवाड़ा खुर्द का एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां कानून की धज्जियां उड़ाते हुए पांच अवैध दुकानें आज भी सीना ताने खड़ी हैं। हैरानी की बात यह है कि इस अवैध निर्माण को हटाने के लिए माननीय जबलपुर हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश है, लेकिन मजाल है कि राजस्व विभाग की कुंभकर्णी नींद टूट जाए।
'मिलीभगत' का खेल या अंधा कानून?
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब कुछ राजस्व विभाग की कथित मिलीभगत और 'मौन संरक्षण' के बिना मुमकिन नहीं है। जब आम आदमी एक इंच भी अवैध निर्माण करे, तो प्रशासन का बुलडोजर चंद घंटों में पहुंच जाता है। लेकिन केलवाड़ा खुर्द में जब पांच-पांच पक्की दुकानें अवैध रूप से खड़ी हो गईं, तो विभाग को सांप सूंघ गया है।
बड़ा सवाल: क्या कटनी राजस्व विभाग के लिए माननीय जबलपुर हाईकोर्ट के आदेशों की कोई अहमियत नहीं है? कोर्ट की अवमानना करने का यह दुस्साहस आखिर किसके दम पर किया जा रहा है?
राजस्व विभाग का अजीब रवैया: 'हमें तो कुछ पता ही नहीं'
सूत्रों की मानें तो इस मामले में जब भी कोई शिकायत की जाती है, तो फाइलें एक टेबल से दूसरे टेबल पर सरकने लगती हैं। विभाग की तरफ से ऐसा बर्ताव किया जा रहा है जैसे केलवाड़ा खुर्द कटनी जिले के नक्शे में ही न हो! यह अनदेखी साफ इशारा करती है कि कहीं न कहीं पर्दे के पीछे 'लेन-देन' का बड़ा खेल चल रहा है, जिसके आगे अदालत का डंडा भी बेअसर साबित हो रहा है।
जनता पूछ रही है तीखे सवाल:
- न्याय का सम्मान कब? जब माननीय जबलपुर हाईकोर्ट ने आदेश दे दिया है, तो अतिक्रमणकारियों को बचाने के लिए कौन सा अदृश्य हाथ काम कर रहा है?
- राजस्व की कैसी लाचारी? क्या कटनी का राजस्व अमला इतना लाचार हो चुका है कि वह पांच अवैध दुकानों को हटाने में खुद को असमर्थ पा रहा है, या फिर मंशा ही साफ नहीं है?
- कलेक्टर साहब, कब खुलेगी आंख? जिले के मुखिया से अब केलवाड़ा खुर्द की जनता न्याय की उम्मीद लगाए बैठी है। क्या दोषियों और लापरवाह अधिकारियों पर गाज गिरेगी?
ब्यूरो रिपोर्ट: कानून की आंखें अंधी हो सकती हैं, लेकिन जनता की आंखें सब देख रही हैं। केलवाड़ा खुर्द में तनी ये पांच अवैध दुकानें सिर्फ अतिक्रमण नहीं हैं, बल्कि यह कटनी राजस्व विभाग के चेहरे पर वो दाग हैं जो चीख-चीख कर कह रहे हैं—“साहब की मर्जी के बिना तो यहां पत्ता भी नहीं हिलता, फिर इतनी बड़ी दुकानें किसकी शह पर खड़ी हैं?”
जल्द ही इस मामले में अगर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) के तहत प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन सकता है।
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