साइलो-पटोरी खरीदी केंद्र बना किसानों के लिए 'आफत', 3 किमी लंबी कतार और भूख-प्यास से बेहाल अन्नदाता!
साइलो-पटोरी खरीदी केंद्र बना किसानों के लिए 'आफत', 3 किमी लंबी कतार और भूख-प्यास से बेहाल अन्नदाता!
नमस्कार, मैं हूँ [आपका नाम]। मध्यप्रदेश के शहपुरा (भिटोनी) क्षेत्र से एक विचलित करने वाली खबर सामने आ रही है। जहाँ एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर 'पटोरी खरीदी केंद्र' किसानों के लिए आफत का सबब बन गया है। 4 दिनों से अपनी उपज बेचने का इंतज़ार कर रहे किसान कड़कती धूप और अव्यवस्थाओं के बीच सड़क पर रहने को मजबूर हैं।
ट्रैक्टरों की लंबी लाइन और परेशान किसान
पटोरी खरीदी केंद्र के बाहर का नजारा किसी मेले जैसा नहीं, बल्कि किसानों के संघर्ष की दास्तां बयां कर रहा है। पिछले 4 दिनों से 3 किलोमीटर लंबी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कतार लगी हुई है।
- भूख और प्यास: किसानों का कहना है कि यहाँ न तो पीने के पानी की व्यवस्था है और न ही सिर छुपाने के लिए कोई शेड। दाने-दाने को मोहताज किसान भूखे-प्यासे ट्रैक्टरों के पहियों के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं।
- प्रशासनिक लापरवाही: केंद्र पर अव्यवस्था का आलम यह है कि तुलाई की गति कछुआ चाल से भी धीमी है, जिससे कतार छोटी होने का नाम नहीं ले रही।
[पूर्व विधायक कुंवर सौरभ सिंह का हस्तक्षेप किया दौरा
इस गंभीर स्थिति की सूचना मिलते ही बहोरीबंद के पूर्व विधायक कुंवर सौरभ सिंह तत्काल मौके पर पहुँचे। उन्होंने न केवल लाइन में लगे किसानों का दर्द सुना, बल्कि खुद खरीदी केंद्र का सघन दौरा किया।
क्या कहा पूर्व विधायक कुंवर सौरभ सिंह ने
"यह किसानों का अपमान है। अन्नदाता 4 दिन से सड़क पर भूखा बैठा है और प्रशासन मौन है। हमने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तत्काल व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाए और तुलाई की गति बढ़ाई जाए। हम किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं, उनके हक की लड़ाई में कोई कमी नहीं आने देंगे।"
मुख्य बिंदु जो उठाए गए:
- तत्काल तुलाई: रुकी हुई तुलाई प्रक्रिया को युद्ध स्तर पर शुरू करने के निर्देश।
- बुनियादी सुविधा: केंद्र पर पानी और छाया के पुख्ता इंतजाम करने की मांग।
- भविष्य की चेतावनी: यदि 24 घंटे के भीतर कतार कम नहीं हुई और किसानों को राहत नहीं मिली, तो बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
अब देखना यह होगा कि पूर्व विधायक के हस्तक्षेप के बाद सोया हुआ प्रशासन जागता है या पटोरी के इन किसानों की रातें अभी और भी लंबी होने वाली हैं।
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