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 अन्नदाता की जमीन पर कंक्रीट का कब्जा, भविष्य पर मंडराता संकट

 'हरे खेतों' को निगलती 'अवैध प्लाटिंग', प्रशासन मौन या मजबूर?

जहाँ कभी लहलहाती फसलें और हरियाली दिखाई देती थी, वहाँ आज सफेद चूने की लाइनें और ईंटों के छोटे-छोटे पिलर नजर आ रहे हैं। शहर के बाहरी इलाकों और गांवों से सटी कृषि भूमि पर भू-माफियाओं की नजर लग चुकी है। बिना किसी अनुमति और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों को ताक पर रखकर की जा रही अवैध प्लाटिंग भविष्य के लिए एक बड़े खतरे का अलार्म बजा रही है।

क्यों है यह भविष्य के लिए खतरा?

  1. ​खाद्य सुरक्षा पर संकटकृषि योग्य भूमि का दायरा लगातार सिमट रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी गति से खेती की जमीन आवासीय भूखंडों में बदलती रही, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए अनाज पैदा करने के लिए जमीन ही नहीं बचेगी।
  2. ​पर्यावरण असंतुलनखेत केवल अनाज नहीं देते, वे जमीन के नीचे जलस्तर (Water Level) को बनाए रखने में भी मदद करते हैं। अवैध कॉलोनियों में न तो ड्रेनेज सिस्टम होता है और न ही जल संचयन की व्यवस्था, जिससे भूजल स्तर गिर रहा है।
  3. ​बुनियादी सुविधाओं का अभावअवैध प्लाटिंग में जमीन खरीदने वाले लोग अक्सर सस्ते के चक्कर में फंस जाते हैं। बाद में वहां सड़क, बिजली, पानी और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ता है क्योंकि वे कॉलोनियां सरकारी रिकॉर्ड में वैध नहीं होतीं।

भू-माफियाओं का खेल: कम दाम, बड़े वादे

​पड़ताल में सामने आया है कि भू-माफिया सीधे किसानों से संपर्क करते हैं और उन्हें बाजार दर से थोड़ा अधिक लालच देकर जमीन का सौदा कर लेते हैं। इसके बाद, बिना किसी डायवर्जन (Land Conversion) और बिना सरकारी नक्शा पास कराए, वहां छोटे-छोटे प्लॉट काटकर बेच दिए जाते हैं। ग्राहकों को "पक्की सड़क" और "जल्द विकास" के झूठे सपने दिखाए जाते हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई: सिर्फ कागजों तक सीमित?

​हैरानी की बात यह है कि मुख्य सड़कों के किनारे खुलेआम अवैध प्लाटिंग के बोर्ड लगे हैं, लेकिन राजस्व विभाग और नगर निगम की टीम कार्रवाई के नाम पर केवल "नोटिस" देकर खानापूर्ति कर लेती है। कभी-कभी पीला पंजा (बुलडोजर) चलता भी है, तो माफिया कुछ ही दिनों बाद फिर सक्रिय हो जाते हैं।

विशेषज्ञ की राय 

"कृषि भूमि को गैर-कृषि कार्य में बदलने के कड़े नियम हैं। अवैध प्लाटिंग न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह अनियोजित शहरीकरण को जन्म दे रही है जो भविष्य में झुग्गी-बस्तियों जैसी समस्याओं को पैदा करेगा।"

 भविष्य के लिए चेतावनी:

​अगर समय रहते प्रशासन ने इन अवैध निर्माणों पर नकेल नहीं कसी, तो शहर के चारों ओर कंक्रीट का ऐसा जंगल खड़ा हो जाएगा, जहाँ न ऑक्सीजन होगी और न ही पेट भरने के लिए अनाज। आम जनता को भी सलाह दी जाती है कि प्लॉट खरीदने से पहले रेरा (RERA) रजिस्ट्रेशन और सरकारी अनुमति की जांच जरूर करें।

सवाल प्रशासन से 

क्या प्रशासन अगली पीढ़ी के हिस्से की रोटी बचाने के लिए सख्त कदम उठाएगा, या भू-माफियाओं के सामने नतमस्तक रहेगा? यह एक बड़ा सवाल है।


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