Chief editor-neeraj pandey 

“लगातार बढ़ती आबादी और शहरीकरण के बीच एक गंभीर संकट चुपचाप पनप रहा है… खेती की उपजाऊ ज़मीनों पर तेजी से हो रही फ्लाटिंग। यह सिर्फ आज की समस्या नहीं, बल्कि आने वाले भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही है। सवाल यह है कि अगर खेत ही नहीं बचेंगे, तो अन्न कहां 

कटनी सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों कृषि भूमि को छोटे-छोटे प्लॉट में बदलने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। किसान, बेहतर मुनाफे के लालच में अपनी उपजाऊ जमीनों को बेच रहे हैं और उन पर अवैध कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं।

खेतों को काटकर बनाए जा रहे प्लॉट

मशीनों से समतलीकरण

कॉलोनी के बोर्ड और सड़कों का निर्माण

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में खाद्यान्न संकट गहराना तय है। एक तरफ सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर कृषि भूमि का इस तरह से खत्म होना कई सवाल खड़े करता है।

“आज जमीन बेचकर पैसा मिल रहा है, लेकिन कल जब खेती नहीं बचेगी, तो हमारी आने वाली पीढ़ी क्या करेगी?”

इस गंभीर समस्या को देखते हुए प्रशासन को सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। विशेष निर्देश जारी किए जाने चाहिए कि—

बिना अत्यंत आवश्यक कारण के कृषि भूमि की बिक्री पर रोक लगे

कृषि भूमि को आवासीय में बदलने की प्रक्रिया को और कड़ा किया जाए

अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई हो“जरूरत है एक संतुलित नीति की, ताकि विकास भी हो और खेती भी बची रहे। क्योंकि अगर खेत खत्म हुए, तो सिर्फ जमीन नहीं… बल्कि हमारा भविष्य भी खतरे में पड़ जाएगा।”

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