*एक विभाग… तीन-तीन प्रभार! उद्योग विभाग में कुर्सी का खेल या नियमों की धज्जियां?*
कटनी -जिले का एकमात्र उद्योग विभाग इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है।
यहां हालात ऐसे बना दिए गए हैं कि एक ही विभाग को वर्तमान में दो-दो लोग ‘प्रभार’ के नाम पर चला रहे हैं, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक उद्योग विभाग में पदस्थ प्रबंधक ज्योति सिंह चौहान के छुट्टी जाने के उपरांत उसी विभाग में पदस्थ तृतीय श्रेणी कर्मचारी सहायक प्रबंधक राजेश पटेल से जब इस संबंध में बात की गई, तो उन्होंने बताया कि प्रबंधक ज्योति सिंह चौहान ने द्वितीय श्रेणी कर्मचारी जैन मैडम को प्रभार सौंपा है।
लेकिन कहानी यहीं पलट जाती है…
जब जैन मैडम से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ कहा कि प्रबंधक मैडम छुट्टी पर हैं।
और जब उनसे यह सवाल किया गया कि “ऐसे में प्रभार किसके पास है?”,तो दो टूक शब्दों में जवाब मिला ।
“वर्तमान में प्रभार सहायक प्रबंधक राजेश पटेल के पास है।”
अब बड़ा सवाल यह है कि—.
आखिर एक ही समय में दो अलग-अलग प्रभार की कहानी क्यों?
जब विभाग में वरिष्ठ कर्मचारी मौजूद हैं, तो तृतीय श्रेणी स्तर के कर्मचारी को किस नियम के तहत इतना बड़ा प्रभार दिया गया?
क्या इसके पीछे कोई लिखित आदेश है या सिर्फ मौखिक व्यवस्था पर पूरा विभाग चल रहा है?
मामला यहीं खत्म नहीं होता…
यह वही विभाग बताया जा रहा है जहां सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर भी टालमटोल की जाती है। कई शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि
जानकारी देने के बजाय दबाव और धमकाने की कोशिशें तक की जाती हैं।
अब निगाहें जिले के कलेक्टर आशीष तिवारी पर टिकी हैं—
क्या उन्हें इन सब व्यवस्थाओं की जानकारी है?
या फिर सब कुछ जानकर भी अनदेखा किया जा रहा है?
या फिर सवाल और भी बड़ा है—
क्या बिना उच्च स्तर की सहमति के इतनी बड़ी प्रशासनिक गड़बड़ी संभव है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रभार वितरण में नियमों की अनदेखी हुई है, तो यह प्रशासनिक आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन हो सकता है और इसकी उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।
कटनी का उद्योग विभाग फिलहाल एक ही सवाल के घेरे में है—
“आखिर असली प्रभारी कौन… और जिम्मेदारी किसकी?”
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्यवाही करता है,
या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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