Chief editor-neeraj pandey 

कटनी जिले की जीवनदायिनी कही जाने वाली कटनी नदी आज अपने ही अस्तित्व के लिए जूझती नजर आ रही है।

कभी स्वच्छ जलधारा के रूप में बहने वाली यह नदी अब जलकुंभी और गंदगी के बोझ तले दम तोड़ती दिखाई दे रही है। हालात यह हैं कि नदी का असली स्वरूप कहीं खो गया है, और ऊपर से सिर्फ हरियाली का दिखावा नजर आता है।

हैरानी की बात यह है कि एक तरफ करोड़ों रुपये सौंदर्यीकरण के नाम पर खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सफाई व्यवस्था पूरी तरह शून्य नजर आती है। सीढ़ियां, घाट और किनारे तो बना दिए गए, लेकिन नदी के भीतर की हालत बद से बदतर होती जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह नदी सिर्फ कागजों में ही रह जाएगी। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन सिर्फ दिखावे पर ध्यान दे रहा है, या वास्तव में नदी को बचाने के लिए कोई गंभीर योजना है?

अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार अधिकारी इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेते हैं, और क्या कटनी की यह जीवनदायिनी नदी फिर से अपनी पुरानी पहचान वापस पा सकेगी या नहीं।

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