“ग्राम पंचायतों की रीढ़ माने जाने वाले सचिव आज खुद ही सिस्टम की लापरवाही के शिकार हो गए हैं… तीन-तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण उनकी हालत बेहद खराब हो चुकी है… आखिर क्यों मजबूर हैं ये कर्मचारी? देखिए ये खास रिपोर्ट 

ग्राम पंचायत स्तर पर काम करने वाले सचिवों की स्थिति इन दिनों बेहद दयनीय बनी हुई है।

तीन माह से वेतन नहीं मिलने के कारण सचिव आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।

घर चलाना हुआ मुश्किल,बच्चों की फीस भरना चुनौती बन गया है,और रोजमर्रा के खर्चों ने इनकी कमर तोड़ दी है।

“जो सचिव गांवों के विकास की योजनाएं संभालते हैं… आज वही अपने परिवार का पेट पालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं!”

लगातार अधिकारियों के चक्कर काटने के बावजूदअब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

सचिवों का आरोप है कि

उन्हें केवल आश्वासन दिया जा रहा है,लेकिन वेतन जारी करने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

,सचिवो का कहना है कि 

“हम तीन महीने से बिना वेतन काम कर रहे हैं… घर चलाना मुश्किल हो गया है… अगर जल्द भुगतान नहीं हुआ तो दिक्कते और बढ सकती है 

“अब सवाल ये है कि क्या सरकार और प्रशासन इन सचिवों की पीड़ा को समझेगा… या फिर गांवों की व्यवस्था संभालने वाले ये कर्मचारी यूं ही तंगहाली में जीने को मजबूर रहेंगे?”

“अगर समय रहते इनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ,

तो इसका सीधा असर गांवों के विकास कार्यों पर पड़ सकता है…”

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