Chief editor-neeraj pandey
जनहित की सड़क पर अड़ंगा! एक फोन कॉल से रुका विकास, आदिवासियों का जीवन संकट में
कटनी।
जहाँ एक ओर जिले में करोड़ों रुपये खर्च कर निजी भूमि पर भी जनहित के लिए सड़कें बनाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द में विकास कार्यों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जहां एक ओर नगर निगम द्वारा भी अवैध कॉलोनियों में भी जनता की सुविधा के लिए सीसी रोड का निर्माण किया जा रहा है, और पीडब्ल्यूडी द्वारा लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से कैलवारा खुर्द मे ही सड़कों का निर्माण किया जा रहा है—भले ही कुछ हिस्से निजी खसरे में आ रहे हों।
लेकिन इसी ग्राम पंचायत के झुरही क्षेत्र में प्रस्तावित दो सड़कों का निर्माण एक विवाद के चलते अधर में लटक गया है।
ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द के सरपंच छूटटू कोल ने बताया कि यहाँ पूर्व मे भी शासकीय मद से रोड बनाई जा चुकी है उसी जगह अब सी सी रोड का निर्माण होना है यह रोड वर्षो से चालू है आगे उनका कहना है कि
जिस भूमि पर सड़क निर्माण प्रस्तावित है, वह खसरा जैन ट्रस्ट के नाम दर्ज दिखाई दे रहा है चौंकाने वाली बात यह है कि स्वयं जैन ट्रस्ट को इस पर कोई आपत्ति नहीं है और उन्होने अपनी अनापत्ति भी लिखित दे दी है ट्रस्ट ने साफ तौर पर कहा है कि जनहित में सड़क निर्माण किया जा सकता है हमे कोई आपत्ति नही है
इसके बावजूद, ग्राम पंचायत के उपसरपंच भूषण पाठक के एक फोन कॉल के बाद जनपद पंचायत के जेई आरती पाल ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। जेई का कहना है कि भूमि निजी है, इसलिए वहाँ सड़क नहीं बनाई जाएगी।
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि जब भूमि स्वामी को कोई आपत्ति नहीं है और कार्य पूरी तरह जनहित में है, तो फिर एक अधिकारी इस कार्य को रोकने का अधिकार कैसे रखता है? क्या एक जेई जनहित से ऊपर है?
इस निर्णय का सबसे ज्यादा असर स्थानीय आदिवासी समुदाय पर पड़ रहा है, जिनके लिए ये सड़के एक सपना और जीवनरेखा साबित हो सकती थीं। सड़क न बनने से उनका जीवन नरक से भी बदतर स्थिति में पहुँचता जा रहा है।
ग्रामीणों में इस फैसले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही इस मामले में उच्च अधिकारियों द्वारा हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या जनहित के इस कार्य को फिर से शुरू किया जाएगा या नहीं।
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