ग्राम हथकुरी में अवैध बीड़ी कारोबार जोरो पर प्रशासन की चुप्पी पर उठे कयी सवाल
रीठी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम हथकुरी में अवैध बीड़ी कारोबार का बड़ा मामला सामने आया है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, गांव निवासी संदीप साहू, पिता बालगोविंद साहू, द्वारा लंबे समय से बिना किसी वैध दस्तावेज के बीड़ी का अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा है जिसमे बीड़ी निर्माण और भंडारण शामिल है
बताया जा रहा है कि बीड़ी निर्माण और भंडारण के लिए आवश्यक लाइसेंस, जीएसटी पंजीयन, तेंदूपत्ता उपयोग की अनुमति सहित अन्य वैधानिक दस्तावेज इनके पास उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद भी लगातार बड़े पैमाने पर कारोबार जारी है। सूत्रों के अनुसार, यहां 20 से 50 लाख तक बीड़ी स्टॉक हमेशा मौजूद रहता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब यह कारोबार वर्षों से संचालित हो रहा है, तो संबंधित विभाग—पुलिस और वन विभाग—अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर पाए?
इस पूरे मामले में कई गंभीर कानूनों का उल्लंघन सामने आता है जानकारो के अनुसार
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 – धोखाधड़ी एवं छल के माध्यम से अवैध लाभ अर्जित करना
वन अधिनियम 1927 की धारा 26 एवं 33 – बिना अनुमति तेंदूपत्ता (वन उत्पाद) का उपयोग और भंडारण
केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम 1944 (Central Excise Act) – बिना रजिस्ट्रेशन बीड़ी उत्पादन और टैक्स चोरी
जीएसटी अधिनियम 2017 की धारा 122 – बिना पंजीयन व्यापार एवं कर चोरी पर दंड
बीड़ी एवं सिगार श्रमिक (रोजगार की शर्तें) अधिनियम 1966 – बिना पंजीयन बीड़ी उत्पादन कराना अवैध
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई, फिर भी जारी कारोबार
सूत्रों के अनुसार, पूर्व में वन विभाग द्वारा एक बार कार्रवाई की गई थी, लेकिन इसके बावजूद यह अवैध कारोबार बंद नहीं हुआ। इससे प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
वैध व्यापारियों को नुकसान की आशंका
इस तरह के अवैध कारोबार से जहां शासन को राजस्व की हानि हो रही है, वहीं वैध लाइसेंसधारी बीड़ी व्यापारियों को भी भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
सख्त कार्रवाई की जरूरत
स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों की मांग है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के अवैध कारोबार पर रोक लगाई जा सके।
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