Chief editor-neeraj pandey
सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार जिले मे बहुतायत मात्रा मे आ रहा नकली खोवा और पनीर स्वास्थ्य पर डाल रहे बुरा प्रभाव
मध्य प्रदेश के कटनी जिले सहित कई जिलों में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है… सवाल दूध से जुड़े उत्पादों की गुणवत्ता और वास्तविकता पर। जब खुद दूध का उत्पादन कम बताया जा रहा है, तो आखिर बाजार में इतना ज्यादा खोया, पनीर, दही और मठा कहां से आ रहा है? क्या कहीं मिलावटी या नकली उत्पादों का खेल तो नहीं चल रहा? आइए देखते हैं ये खास रिपोर्ट।
कटनी जिले के साथ-साथ आसपास के कई जिलों में इन दिनों डेयरी उत्पादों की भरमार देखी जा रही है। बाजार में खुलेआम खोया, पनीर, दही और मठा बड़ी मात्रा में बिक रहा है।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि स्थानीय स्तर पर दूध उत्पादन उतना नहीं है, जितना इन उत्पादों की खपत और उपलब्धता दिखाई दे रही है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब दूध ही पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है, तो आखिर ये डेयरी उत्पाद तैयार कैसे हो रहे हैं?
क्या इनमें सिंथेटिक या मिलावटी सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार में बिक रहे कई डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता पर संदेह है। कई बार स्वाद और रंग में भी अंतर देखने को मिलता है, जिससे मिलावट की आशंका और बढ़ जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो मिलावटी खोया, पनीर या दही का सेवन सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। इससे पेट संबंधी बीमारियों के साथ-साथ गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
ऐसे में अब जरूरत है सख्त कार्रवाई की…
खाद्य विभाग को चाहिए कि वह इस पूरे मामले को गंभीरता से ले और विशेष अभियान चलाकर जांच करे।
डुप्लीकेट और मिलावटी डेयरी उत्पाद बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो सके।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।
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