महगांव का जहरीला सच

कटनी जिले की विजय राघवगढ जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाला महगांव ग्राम पंचायत… आज विकास नहीं, बल्कि विनाश की कहानी बयां कर रहा है।

जहाँ एक ओर मजदूर दिन-रात मेहनत कर अपनी जिंदगी चलाने की कोशिश कर रहे हैं… वहीं दूसरी ओर उद्योगों से निकलता जहरीला धुआं और धूल उनकी सांसों को धीरे-धीरे छीन रहा है।

“आय नहीं बढ़ रही… लेकिन सांसें जरूर घट रही हैं…”

जी हाँ, महगांव में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि दिन में भी धुंध जैसी स्थिति बनी रहती है। यह धुंध  धूल मौसम की नहीं, बल्कि उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण की है।

ग्राम पंचायत के सरपंच ने खुलकर बताया कि उन्होंने कई बार इन प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों का विरोध किया… लेकिन इन उद्योगों की पहुंच इतनी ऊँची है कि स्थानीय स्तर पर उनकी आवाज दबा दी जाती है।

इतना ही नहीं… क्षेत्र के विधायक संजय पाठक ने भी इस गंभीर मुद्दे को उठाया… लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि… 👉 मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं

👉 न सेफ्टी शूज

👉 न ग्लव्स

👉 न मास्क

👉 और न ही सिर की सुरक्षा के उपकरण

यानी मजदूरों को सीधे मौत के मुंह में धकेला जा रहा है।सवाल ये है कि— 

👉 क्या जिला प्रशासन को यह जहरीला धुआं दिखाई नहीं देता?

👉 क्या मजदूरों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं है?👉 और आखिर कब तक उद्योगों की मनमानी यूँ ही चलती रहेगी?

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कार्रवाई करता है… या फिर महगांव के मजदूर यूँ ही अपनी सांसों की कीमत चुकाते रहेंगे।


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