"जब कलम से ही उठे सवाल, तो सच की राह कौन दिखाए?"
कटनी जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ पत्रकारिता जगत के भीतर ही विवाद गहराता नजर आ रहा है। आमतौर पर पत्रकार एक-दूसरे के अधिकारों की रक्षा और समर्थन के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है।
क्या है मामला
मध्यप्रदेश के कटनी में इन दिनों पत्रकारों के बीच एक अनोखा विवाद जन्म ले रहा है। जानकारी के अनुसार, कुछ वरिष्ठ पत्रकारों ने जिले के कलेक्टर को शिकायत सौंपते हुए नवीन और सक्रिय पत्रकारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नए पत्रकार बिना उचित मान्यता और नियमों का पालन किए कार्य कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, युवा और सक्रिय पत्रकारों का कहना है कि यह कदम उनके अधिकारों को दबाने और उनकी आवाज को कमजोर करने की कोशिश है।
तथ्य और विश्लेषण:
पत्रकारिता में मान्यता का एक निर्धारित सिस्टम होता है, जिसे राज्य जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी किया जाता है।
कई छोटे और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े पत्रकारों को अब तक आधिकारिक मान्यता नहीं मिल पाई है, लेकिन वे जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं।
डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने पत्रकारिता के स्वरूप को बदल दिया है, जिससे पारंपरिक और नए पत्रकारों के बीच टकराव की स्थिति बन रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद "पुरानी बनाम नई पत्रकारिता" का टकराव भी हो सकता है।
विवाद का दूसरा पहलू:
जहाँ एक ओर वरिष्ठ पत्रकार नियमों और व्यवस्था की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर युवा पत्रकार इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या यह वास्तव में नियमों का पालन सुनिश्चित करने की कोशिश है या फिर प्रतिस्पर्धा के चलते पैदा हुआ मतभेद?
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या पत्रकारों के बीच बढ़ती इस खाई को पाटने के लिए कोई पहल की जाती है या नहीं। फिलहाल, कटनी में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है।
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