Chief editor-neeraj pandey 
मध्य प्रदेश में कभी आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शुरू की गई “जन सुनवाई” अब खुद सवालों के घेरे में नजर आ रही है।

 कटनी जब पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान थे, तब उन्होंने लोगों की शिकायतों को सीधे प्रशासन तक पहुंचाने के लिए हर मंगलवार “जन सुनवाई” की व्यवस्था शुरू की थी। उद्देश्य साफ था — जनता की समस्या, तुरंत समाधान।

लेकिन अब हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
जिले के कलेक्टर कार्यालय में हर मंगलवार फरियादी अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते हैं, लेकिन आरोप है कि इन शिकायतों का निराकरण समय पर नहीं हो रहा। कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां लोग महीनों नहीं बल्कि सालों से चक्कर काट रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द से सामने आया है।
👉 यहां के वर्तमान सरपंच छुटटू कोल ने करीब आठ महीने पहले जन सुनवाई में शिकायत दर्ज कराई थी।
👉 शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पूर्व सरपंच माधुरी पाठक द्वारा वर्ष 2016-17 में फर्जी तरीके से लाखों रुपये की राशि निकाली गई।


लेकिन हैरानी की बात ये है कि—पहली शिकायत के छह महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

फिर दोबारा आवेदन दिया गया… उसके बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
❗ बड़ा सवाल

जब एक जनप्रतिनिधि की शिकायत—वो भी भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दे पर—महीनों तक अनसुनी रह जाए,

तो आम जनता का भरोसा कैसे बना रहेगा?
क्या “जन सुनवाई” सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह गई है?
क्या प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही की कमी है?
📢 समापन
अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी इस व्यवस्था की समीक्षा करें,
ताकि “जन सुनवाई” फिर से अपने मूल उद्देश्य —
जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान — को पूरा कर सके।

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