Chief editor-neeraj pandey 

कटनी नगर के तहसीलदार अजीत तिवारी इन दिनों अपने व्यवहार को लेकर चर्चा में हैं। आरोप है कि उन्होंने एक जनप्रतिनिधि के साथ शहंशाही अंदाज़ में बात की और उनकी समस्या सुनने के बजाय उल्टा सवाल-जवाब करने लगे।

मामला ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द का है, जहां झुरही मे अवैद कब्जे को लेकर  भूमि के सीमांकन के लिए लगभग ढाई महीने पहले आवेदन लगाया गया था। लेकिन इतने समय बीत जाने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द के आदिवासी सरपंच छुट्टू कोल अपने सहयोगी  के साथ इस संबंध में जानकारी लेने कटनी तहसील कार्यालय पहुंचे।

बताया जा रहा है कि सरपंच और उनके साथी जैसे ही तहसीलदार अजीत तिवारी के केबिन में पहुंचे और अपनी समस्या बताने की कोशिश की, उससे पहले ही तहसीलदार ने उनसे सवाल करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि आप किससे पूछकर केबिन में आए, क्या हमारे चपरासी ने आपको रोका नहीं, और आप बिना पूछे कुर्सी पर कैसे बैठ गए।

सरपंच और उनके साथ आए उनके साथी का कहना है कि वे सिर्फ अपने आवेदन की स्थिति जानने गए थे, लेकिन उनकी समस्या सुनने के बजाय तहसीलदार का यह रवैया उन्हें बेहद असहज लगा।

अब सवाल यह उठता है कि जब एक ग्राम पंचायत का सरपंच, जो कि गांव का चुना हुआ जनप्रतिनिधि है, यदि उसके साथ भी इस तरह का व्यवहार किया जाता है तो आम जनता के साथ कैसा व्यवहार किया जाता होगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान के लिए नियुक्त किए जाते हैं, न कि शहंशाही दिखाने के लिए। ऐसे में प्रशासन को इस पूरे मामले पर संज्ञान लेना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जनता के प्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार हो।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है और लोग प्रशासन से जवाब की अपेक्षा कर रहे हैं।


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