Chief editor-neeraj pandey 

कटनी जिले में तेजी से बढ़ रही अवैध कॉलोनियों का जाल अब एक बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। खेती की उपजाऊ जमीन पर धड़ल्ले से प्लॉटिंग की जा रही है, और प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में लोगों के पास रहने के लिए मकान तो होंगे, लेकिन खाने के लिए अनाज नहीं बचेगा।

कटनी जिले के ग्रामीण और आसपास के इलाकों में इन दिनों खेती की जमीन तेजी से खत्म होती नजर आ रही है। किसानों को लालच देकर या मजबूरी में उनकी जमीनें खरीदी जा रही हैं, और फिर बिना किसी वैध अनुमति के उन्हें छोटे-छोटे प्लॉट में बांटकर बेचा जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जहां खेतों में हरियाली नजर आती थी, अब वहां कंक्रीट के ढांचे खड़े हो रहे हैं। अवैध कॉलोनियों का यह विस्तार न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि भविष्य में खाद्य संकट की ओर भी इशारा करता है।

“आज हम अपनी जमीन बेच रहे हैं, लेकिन आने वाली पीढ़ी क्या खाएगी? यह सोचने वाली बात है।”

🏢 प्रशासन पर सवाल:

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन इस पर सख्ती क्यों नहीं दिखा रहा? बिना नक्शा पास हुए और नियमों का पालन किए बिना कॉलोनियां कैसे बस रही हैं?

 विशेषज्ञों की चेतावनी:

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह खेती की जमीन खत्म होती रही, तो आने वाले वर्षों में अनाज की भारी कमी हो सकती है। इससे महंगाई बढ़ेगी और आम जनता को गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा।

कटनी में बढ़ती अवैध प्लॉटिंग सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि भविष्य के बड़े संकट की चेतावनी है। जरूरत है समय रहते ठोस कदम उठाने की, ताकि आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा न भुगतना पड़े।

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