Chief editor-neeraj pandey
कटनी जिला पंचायत में लोकायुक्त कार्रवाई के बाद नया विवाद – सत्येंद्र सोनी पर गिरी गाज, लेकिन ज्ञानेन्द्र सिंह पर सस्पेंस क्यों?
कटनी जिला पंचायत में दो दिन पहले हुई लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई के बाद जहां बाबू सत्येंद्र सोनी पर शिकंजा कस गया, वहीं अब एक नया सवाल खड़ा हो गया है। पंचायत सेल स्थापना शाखा में पदस्थ प्रभारी ज्ञानेन्द्र सिंह की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं। आखिर यदि वे दोषी हैं तो कार्रवाई. के नाम पर केवल प्रभार बस क्यों छीना गया और यदि निर्दोष हैं तो उनका प्रभार भी नहीं छीना जाना चाहिए था
कटनी जिला पंचायत में हाल ही में लोकायुक्त की कार्रवाई ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी। बाबू सत्येंद्र सोनी को रंगे हाथों पकड़ने के बाद उन पर तत्काल कार्रवाई की गई। लेकिन अब पूरा फोकस पंचायत सेल स्थापना शाखा पर आकर टिक गया है।
सूत्रों के अनुसार
, इसी शाखा में प्रभारी के रूप में कार्यरत ज्ञानेन्द्र सिंह का प्रभार भी जिला पंचायत सीईओ हर सिमरन प्रीत कोर द्वारा छीन लिया गया है। यहीं से सवालों की लंबी फेहरिस्त शुरू होती है।
यदि ज्ञानेन सिंह की भूमिका संदिग्ध थी, तो क्या उन्हें सह-अभियुक्त बनाकर लोकायुक्त के दायरे में नहीं लाया जाना चाहिए था?
और यदि उनकी कोई भूमिका नहीं थी, तो फिर बिना स्पष्ट कारण उनके अधिकार क्यों छीने गए?
प्रशासन की इस आधी-अधूरी कार्रवाई पर अब विपक्ष और आमजन दोनों सवाल उठा रहे हैं। क्या यह केवल दिखावे की कार्रवाई है? या फिर जांच की आंच अभी और नामों तक पहुंचेगी?
कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसे सह-आरोपी बनाना जांच प्रक्रिया का हिस्सा होता है। वहीं यदि कोई निर्दोष है, तो उसके अधिकारों को सीमित करना भी प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
बड़ा सवाल:
क्या पंचायत सेल स्थापना शाखा में और भी नाम सामने आएंगे?क्या लोकायुक्त की जांच का दायरा बढ़ेगा?
और सबसे अहम — क्या जिला पंचायत प्रशासन इस पूरे मामले पर स्पष्ट बयान देगा?
कटनी जिला पंचायत में उठे इन सवालों के जवाब अब जनता जानना चाहती है। कार्रवाई आधी क्यों दिख रही है? सच क्या है?
हम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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