Chief editor-neeraj pandey 

कटनी जिला पंचायत से दो दिन पूर्व  एक बड़ी खबर सामने आई थी, जहाँ  जिला पंचायत  में पदस्थ बाबू सत्येंद्र सोनी को लोकायुक्त  की टीम ने रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद जिला पंचायत में हड़कंप मच गया है और कई सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या हैं मामला 

मामला कटनी जिला पंचायत का है, जहाँ बाबू सत्येंद्र सोनी पर रिश्वत लेने के आरोप में कार्रवाई की गई। बताया जा रहा है कि जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कर उन्हें पकड़ा। इस कार्रवाई के बाद पंचायत सेल स्थापना शाखा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

एक और कार्यवाही 

इसी शाखा में पदस्थ रहे ज्ञानेंद्र सिंह का प्रभार अचानक हटा दिया गया है। जिला पंचायत सीईओ हर सिमरन प्रीत कौर द्वारा.27/02/26 को दिये गए आदेश पत्र के अनुसार प्रभार अनुराग मोदी को सौंपे जाने के बाद चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल यह उठ रहा है कि यदि शाखा में अनियमितताएँ थीं, तो क्या केवल एक कर्मचारी  पर कार्रवाई पर्याप्त है? क्या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए?

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि यदि सत्येंद्र सोनी पर लोकायुक्त की कार्रवाई हुई है, तो क्या ज्ञानेंद्र सिंह को सह-अरोपी बनाकर जांच के दायरे में नहीं लाया जाना चाहिए था? या फिर प्रभार हटाना ही प्रशासन की प्राथमिक कार्रवाई है?


फिलहाल जिला पंचायत प्रशासन ने स्थापना शाखा का प्रभार बदलकर अनुराग मोदी को दे दिया है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि कटनी जिला पंचायत में और कितने ऐसे मामले दबे हो सकते हैं, जिन पर अब जांच की जरूरत है।

लोकायुक्त की इस कार्रवाई से निश्चित रूप से जिला पंचायत में दहशत का माहौल है। लेकिन क्या यह कार्रवाई आगे और भी नामों का खुलासा करेगी? क्या प्रशासन अन्य संभावित जिम्मेदारों पर भी सख्त कदम उठाएगा? यह आने वाला समय बताएगा

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