Chief editor-neeraj pandey 

कटनी जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली बड़ेरा ग्राम पंचायत में इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत बडेरा में नियुक्त एक महिला सचिव  के बीमार होने के कारण पिछले लगभग एक वर्ष से उनके पति ही अनौपचारिक रूप से सचिव का कार्य संभाल रहे हैं। इतना ही नहीं, पंचायत के प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ वित्तीय लेनदेन भी उनके द्वारा किए जाने की चर्चा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले की जानकारी जनपद पंचायत स्तर तक है, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है। सवाल यह उठता है कि क्या किसी सरकारी पद पर नियुक्त व्यक्ति की अनुपस्थिति में उसके परिजन को अधिकारिक रूप से कार्य करने की अनुमति है? नियमों के अनुसार किसी भी शासकीय पद पर नियुक्ति विधिवत प्रक्रिया से होती है और वित्तीय अधिकार भी अधिकृत अधिकारी को ही दिए जाते हैं।

जनपद पंचायत कटनी के मुखिया प्रदीप सिंह की भूमिका पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं। यदि मामला संज्ञान में है, तो जांच और वैधानिक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि संज्ञान में नहीं है, तो यह प्रशासनिक निगरानी की बड़ी चूक मानी जाएगी।

ग्रामीणों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, यह स्पष्ट किया जाए कि किस आदेश के तहत गैर-अधिकृत व्यक्ति पंचायत के वित्तीय कार्य देख रहा है, और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है — क्योंकि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही ही लोकतंत्र की असली नींव मानी जाती है।

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