कटनी जनपद पंचायत में एक अधिकारी ऐसे भी जो विकास की बात करने पर जनप्रतिनिधियों को जवाब देते हैं कि क्या आप अपने गांव को अमेरिका बना दोगे
कटनी जनपद पंचायत में एक अधिकारी ऐसे भी जो विकास की बात करने पर जनप्रतिनिधियों को जवाब देते हैं कि क्या आप अपने गांव को अमेरिका बना दोगे
सूत्रों के हवाले से कटनी जनपद पंचायत में जनप्रतिनिधियों के सम्मान और अधिकारों को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। जब गांव के पंच, सरपंच और जनपद सदस्य अपने क्षेत्र के विकास की बात करते हैं, तो क्या उन्हें उपहास और तंज का सामना करना चाहिए?
जनपद पंचायत कटनी में पदस्थ एक जिम्मेदार अधिकारी का कथित बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि जब पंचायत प्रतिनिधि सड़क, पानी, नाली, आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग करते हैं, तो अधिकारी जवाब में कहते हैं—
“क्या आप अपने गांव को अमेरिका बना लोगे?”
यह सवाल नहीं, बल्कि एक तंज है—और वह भी उन जनप्रतिनिधियों पर, जिन्हें जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुना है।
पंच–सरपंचों का कहना है कि वे कोई असंभव मांग नहीं कर रहे, बल्कि संविधान और पंचायती राज अधिनियम के तहत मिले अधिकारों के अनुसार गांव के विकास की बात कर रहे हैं। ऐसे में इस तरह की टिप्पणी न केवल अपमानजनक है, बल्कि अधिकारियों की मानसिकता पर भी सवाल खड़े करती है।
विश्लेषण:
भारत का संविधान ग्राम पंचायतों को स्वशासन का अधिकार देता है। “ग्राम स्वराज” की परिकल्पना में गांव को आत्मनिर्भर और विकसित बनाना कोई मज़ाक नहीं, बल्कि शासन की जिम्मेदारी है। फिर सवाल यह उठता है कि
क्या विकास की बात करना अपराध है?
क्या जनप्रतिनिधियों को ताने सुनाने के लिए ही अधिकारी नियुक्त किए गए हैं?
और क्या “अमेरिका” शब्द का उपयोग कर गांवों के विकास को हीन बताना उचित है?
जनभावना:
ग्रामीणों का कहना है कि अगर अधिकारी इसी सोच के साथ काम करेंगे, तो गांवों का विकास कैसे होगा? जनप्रतिनिधियों का मनोबल टूटेगा और लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होंगी।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या जिम्मेदार अधिकारी से जवाबदेही तय होगी, या फिर पंचायत प्रतिनिधियों की आवाज यूँ ही तंज के नीचे दबा दी जाएगी?
कटनी से नीरज़ पांडेय की रिपोर्ट।
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