जनपद पंचायत कटनी की अफसरशाही पर सवाल — एस डी ओ (AE) की लापरवाही से कैलवारा खुर्द के कुम्हार मोहल्ले की सड़क आज भी अधूरी

Chief Editor- Neeraj Pandey 


जनपद पंचायत कटनी की अफसरशाही पर सवाल — एस डी ओ  (AE)  की लापरवाही से कैलवारा खुर्द  के कुम्हार मोहल्ले की सड़क आज भी अधूरी


जनपद पंचायत कटनी में अफसरशाही की मनमानी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द  के कुम्हार मोहल्ला, वार्ड नंबर 6–7 की सड़क—जिसका भूमि पूजन लगभग एक वर्ष पहले हो चुका—आज तक कागज़ों से बाहर नहीं आ सकी। वजह बताई जा रही है—जनपद पंचायत कटनी के SDO  द्वारा तकनीकी स्वीकृति का लंबित रखा जाना।

इस मामले में ग्राम के सरपंच आदिवासी  छुट्टु कोल  से भी फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि मेरे तरफ से कोई देरी नहीं है लगभग तीन बार प्रस्ताव दिए जाने के बाद भी मुझे आज तक तकनीकी स्वीकृति प्रदान नहीं की गई है यह शायद इसलिए हो रहा है कि मैं आदिवासी हूं गरीब हूं और पढ़ा लिखा नहीं हूं इसी लिए अधिकारी मेरी बात नहीं सुनते हैं सवाल फिर एक बार यही खड़ा होता है कि क्या आदिवासी सरपंच छुट्टु कोल  की फरियाद कोई सुनेगा या फिर यूं ही पंचायत  अपने विकास के लिए जनपद पंचायत के चक्कर लगाती रहेगी

इसके बाद वहां के पंच उषा मनीष गौतम से भी चर्चा की गई तो  मनीष गौतम ने बताया कि मैं और सरपंच भी एक बार एसडीओ के पास इस सड़क के लिए गए हुए थे तो उन्होंने मुझसे स्पष्ट कह दिय दिया था कि आपको जहां शिकायत करनी हो कर दें मेरा कोई कुछ नहीं कर पाएगा 

आपको बता दे की   ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द  में कुम्हार मोहल्ला वार्ड 6 और 7 की सड़क के लिए सरपंच और सचिव के माध्यम से तीन बार प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद जनपद पंचायत कटनी के SDO ने अब तक तकनीकी स्वीकृति नहीं दी। नतीजा—ग्रामीण आज भी कच्चे, जर्जर रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भूमि पूजन को लगभग एक साल बीत चुका है, फिर भी काम शुरू नहीं हुआ। सवाल उठता है—जब जनप्रतिनिधि प्रस्ताव दे चुके, पंचायत ने औपचारिकताएं पूरी कर दीं, तो आखिर फाइल किस दबाव में रोकी गई है?

 सवाल:

क्या जनपद पंचायत कटनी के SDO पर किसी का दबाव है?

तकनीकी स्वीकृति में देरी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

पंचायतों को मिले अधिकार सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित क्यों?

इस पूरे मामले की जानकारी तत्कालीन जनपद पंचायत कटनी के सीईओ को भी दी गई थी, लेकिन नतीजा शून्य रहा। इससे साफ है कि शिकायतों पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।

जनहित का मुद्दा:

अधूरी सड़क सिर्फ विकास की रफ्तार नहीं रोकती, बल्कि बच्चों, बुज़ुर्गों और मरीजों की आवाजाही को भी जोखिम में डालती है। बरसात में कीचड़, गर्मियों में धूल—और हर मौसम में परेशानी—यह कीमत आखिर पंचायत और ग्रामीण क्यों चुकाएं?

कड़ा सवाल :

जब पंचायतें प्रस्ताव देती हैं, भूमि पूजन हो जाता है, तो अधिकारियों की मनमानी कब तक?

जनपद पंचायत कटनी में जवाबदेही तय कौन करेगा?और सबसे बड़ा सवाल—अफसरशाही पर अंकुश आखिर लगाएगा कौन?


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