भ्रष्टाचार की आग में झुलसती ग्राम पंचायत साह नगर, पन्ना (म.प्र.)
भ्रष्टाचार की आग में झुलसती ग्राम पंचायत साह नगर, पन्ना (म.प्र.)
मध्य प्रदेश के पन्ना ज़िले की ग्राम पंचायत साह नगर आज गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में है।
यह आरोप हम नहीं लगा रहे, बल्कि ग्राम के निवासी प्रह्लाद चक्रवर्ती और अन्य ग्रामीण लगातार प्रशासन के सामने रख रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि
👉 तीन लाख, चार लाख, यहाँ तक कि पाँच लाख रुपये तक के भुगतान वाले बिल बिना जीएसटी के लगाए जा रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल —
आख़िर ग्राम पंचायत साह नगर को बिना जीएसटी के बिल पास करने का अधिकार किसने दिया?
कानून के जानकारों के अनुसार,
बिना जीएसटी के इतने बड़े बिल लगाना
📌 GST अधिनियम का खुला उल्लंघन है
📌 सरकारी धन की हेराफेरी की श्रेणी में आता है
📌 और इसे देश की राजस्व व्यवस्था के साथ गद्दारी माना जा सकता है।
🧾 फर्जी ट्रेडर्स, असली भुगतान
प्रह्लाद चक्रवर्ती का आरोप है कि
🔴 पंचायत के सरपंच ने अपने ही भाई के नाम से फर्जी ट्रेडर्स बनवाकर लाखों रुपये के बिल लगवाए।
🔴 वहीं पंचायत सचिव, जो कि शासन का प्रतिनिधि होता है, उसने भी अपने रिश्तेदार के नाम से फर्जी ट्रेडर्स बनवाकर बिना जीएसटी के भुगतान करवाए।
इन पैसों को लेकर आरोप और भी गंभीर हैं —
👉 यह राशि केवल पंचायत तक सीमित नहीं रहती है? बल्कि ऊपर से नीचे तक “व्यवस्था” को साधने के लिए बाँटी जाती है
👉 ताकि कभी कोई ठोस कार्रवाई न हो सके
📑 शिकायतें, लेकिन कार्रवाई शून्य
प्रह्लाद चक्रवर्ती बताते हैं कि उन्होंने सालों से शिकायतें की हैंजनपद, ज़िला और अन्य विभागों के चक्कर लगाए लेकिन
❌ जाँच आगे नहीं बढ़ीदोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई
इस लगातार अनदेखी से आहत होकरउन्होंने प्रशासन को लिखित रूप से चेतावनी दी है कि
📅 26 जनवरी 2026 से वे अग्नि सत्याग्रह करेंगे।
🔥 गणतंत्र दिवस पर अग्नि सत्याग्रह की चेतावनीअब सवाल यह है कि
👉 जब एक नागरिक को न्याय पाने के लिए अग्नि सत्याग्रह की चेतावनी देनी पड़े
👉 तो क्या यह प्रशासनिक व्यवस्था की असफलता नहीं?
👉 क्या साह नगर पंचायत में हो रहा यह खेलईमानदार टैक्सदाताओं के साथ अन्याय नहीं है?
👉 क्या GST विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभागऔर ज़िला प्रशासन इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेगा?
📢 जनता पूछ रही है सवाल
अगर अब भी जाँच नहीं हुई,अगर अब भी दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई,तो यह मामला केवल एक पंचायत का नहीं रहेगा,बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल बन जाएगा।

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