कटनी- मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के कर्मचारियों की कार्य प्रणाली संदेश के घेरे में
कटनी- मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के कर्मचारियों की कार्य प्रणाली संदेश के घेरे में
मध्य प्रदेश विद्युत मंडल की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्राम देव डोगरा निवासी कोडू लाल चौधरी की पत्नी में बाई पिछले तीन दिनों से विद्युत कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर रही।
दरअसल, किसी कारणवश में बाई समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाई थीं। इसके बाद विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने उनकी कृषि मशीन से जुड़ी बिजली की तार — जो कि उनके अनुसार तीन बंडल थी — उसे उतारकर अपने साथ ले गए।
तीन दिन बाद जब मेँम् बाई ने पूरा बकाया बिल जमा कर दिया और अपनी तार वापस मांगने विद्युत कार्यालय पहुंचीं, तो उन्हें तीन बंडल की जगह केवल एक बंडल तार दी गई।
जब में बाई ने वह तार अपने खेत में जाकर फैलाई, तो वह तार मशीन तक पहुंचने से पहले ही छोटी पड़ गई। इसके बाद में बाई दोबारा विद्युत कार्यालय पहुंचीं और पूरी तार देने की मांग की, लेकिन आरोप है कि कर्मचारियों ने उन्हें टाल दिया और तार देने से मना कर दिया।
मेम बाई (कोदू लाल चौधरी की पत्नी): का कहना है
“हमसे बिना बताए तीन बंडल तार उतार ली गई। बिल जमा कर दिया, फिर भी एक ही बंडल दी। खेत में तार छोटी पड़ गई, मशीन कैसे चलाएं? बहुत परेशान किया गया।”
मामला तब और गंभीर हो गया जब पीड़ित महिला को लगातार कार्यालय से खाली हाथ लौटना पड़ा। अंततः मीडिया के हस्तक्षेप के बाद विद्युत विभाग हरकत में आया।
मनोज तिवारी (जूनियर इंजीनियर, विद्युत मंडल) का कहना है
“मामले की जानकारी मिलने के बाद जांच की गई। जो भी उपभोक्ता की वास्तविक तार थी, उसे वापस करा दिया गया है। आगे ऐसी शिकायत न हो, इसके लिए कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं।”
हालांकि सवाल यह है कि अगर मीडिया का हस्तक्षेप न होता, तो क्या एक गरीब किसान परिवार को उसकी हक की बिजली तार मिल पाती? यह मामला विद्युत विभाग की कार्यशैली और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

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