*फर्जी खबरों की फैक्ट्री! लिफाफा पत्रकारिता के सहारे वसूली और बदनामी का खेल*

chief editor -Neeraj pandey 

*फर्जी खबरों की फैक्ट्री! लिफाफा पत्रकारिता के सहारे वसूली और बदनामी का खेल*


जिले में फर्जी खबरें गढ़ने, चरित्रहनन करने और लोगों को डराकर वसूली करने का एक संगठित तंत्र सक्रिय होने की चर्चा तेज हो गई है। उद्योग विभाग से जुड़ी खबरों में सामने आए तथ्यों ने न केवल पत्रकारिता की साख पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि 

 संरक्षण की आशंका भी पैदा कर दी है।

झूठी निकली खबर अजय सागर आज भी वित्तीय प्रभार मे

सूत्र बताते हैं कि उद्योग विभाग में पदस्थ महाप्रबंधक मैडम के इर्द-गिर्द पनप रहे विवादों के बीच विभाग में पदस्थ कर्मचारी अजय सागर को बिना किसी ठोस प्रमाण के झूठी खबरों के माध्यम से बदनाम किया जा रहा है। आरोप है कि तथाकथित दलाल प्रवृत्ति के लोग लिफाफे के सहारे फर्जी खबरें चलवाकर अपने आकाओं को सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहे हैं।

संत से लेकर कर्मचारी तक—किसी को नहीं छोड़ा

माधव नगर क्षेत्र के देश-प्रसिद्ध संत बाबा ईश्वर शाह को भी इस फर्जीवाड़े के खेल में घसीटा गया। पाठकों को स्मरण होगा कि इससे पहले भी “बाबा रे बाबा” जैसे भ्रामक और अपमानजनक शीर्षकों के साथ खबरें चलाई गई थीं, जिसका उद्देश्य केवल सनसनी फैलाना और दबाव बनाना था।

स्पा सेंटर की भी चली थी खबर

यही कथित दलाल पूर्व में एक स्पा सेंटर को भी झूठी खबरों के जरिए बदनाम कर चुका है। मामला इतना बढ़ा कि स्पा सेंटर संचालक को पुलिस अधीक्षक के समक्ष उपस्थित होकर ब्लैकमेलिंग की लिखित शिकायत दर्ज करानी पड़ी थी। इसके बावजूद संबंधित व्यक्ति/समूह पर कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।


मुक्तिधाम, लकड़ी चोर और अधूरी खबरें

माधव नगर क्षेत्र के मुक्तिधाम से संबंधित खबर में “मुर्दों की लकड़ी चोर” का जिक्र कर अगले समाचार में नाम उजागर करने का दावा किया गया, लेकिन हैरत की बात यह है कि आज दिनांक तक उस कथित चोर का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया। यह तथ्यों को तोड़-मरोड़कर खबर चलाने का एक और उदाहरण माना जा रहाहंगामा

पूर्व में भी विजयराघव गढ़ क्षेत्र की एक सम्मानित महिला के खिलाफ अभद्र टिप्पणी पर हो चुका है हंगामा

 जिस पर वहां के महिला संगठन ने कैमोर् थाना प्रभारी को ज्ञापन भी सोपा था  इस प्रकार की भ्रामक खबरें चलाकर सनसनी पैदा करना इनका शौक बन गया है

निजीकृत  फोटो उठाकर बदनामी—पत्रकारिता या अपराध 

यह है प्रावधान

          
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66E के तहत गोपनीयता का उल्लंघन: आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 66E, अंतरंग छवियों के अनिच्छुक कैप्चर, प्रकाशन और प्रसारण के माध्यम से गोपनीयता के उल्लंघन को संबोधित करती है। इसका उद्देश्य व्यक्तियों को उनकी अंतरंग छवियों या वीडियो के अनधिकृत उपयोग से बचाना है।                  

 अजय सागर ने बताया मेरे व्हाट्स अप से निकाली गई फोटो

सबसे गंभीर मामला तब सामने आया जब उद्योग विभाग के एक छोटे, सीधे-साधे कर्मचारी को निशाना बनाया गया। शिकायतकर्ता अजय सागर के व्हाट्सएप स्टेटस पर लगी निजी फोटो को उठाकर उसे खबर का आधार बनाया गया। बिना जांच, बिना सबूत, इस प्रकार किसी व्यक्ति की सामाजिक छवि धूमिल करना न सिर्फ पत्रकारिता की हत्या है, बल्कि कानूनन अपराध की श्रेणी में भी आता है।

प्रशासन से सीधी मांग

अब सवाल यह नहीं कि फर्जी खबरें चलाई जा रही हैं, बल्कि यह है कि—

क्या लिफाफा पत्रकारिता और ब्लैकमेलिंग के इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच होगी?

क्या उद्योग विभाग से जुड़े मामलों में फर्जी खबरें चलाने वालों की भूमिका की जांच कराई जाएगी?

क्या निजी फोटो और अप्रमाणित आरोपों के आधार पर खबर चलाने वालों पर आईटी एक्ट और मानहानि कानून के तहत कार्रवाई होगी?


जिले की जनता और पीड़ित पक्ष यह मांग करते हैं कि कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक स्वयं संज्ञान लेकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराएं, ताकि सच्ची पत्रकारिता और फर्जीवाड़े के बीच का अंतर स्पष्ट हो सके।

यदि अब भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह मान लिया जाएगा कि इस फर्जीवाड़े के खेल को कहीं-न-कहीं मौन संरक्षण प्राप्त है।

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