नागौद से मैहर तक 140 करोड़ की सड़क में घटिया पत्थर का खेल! जंगल, राजस्व और खनन माफिया की मिलीभगत?
नागौद से मैहर तक 140 करोड़ की सड़क में घटिया पत्थर का खेल! जंगल, राजस्व और खनन माफिया की मिलीभगत?
घटिया पत्थर गिट्टी का होता उपयोगएक ओर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर सड़कों की गुणवत्ता सुधारने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर नागौद से मैहर तक बन रही 140 करोड़ रुपये की सड़क में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार, इस सड़क निर्माण में घटिया और मानकविहीन पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है। सड़क की बेस और लेयरिंग में जिस पत्थर का इस्तेमाल हो रहा है, वह आईएस मानकों पर खरा नहीं उतरता, जिससे आने वाले समय में सड़क के जल्दी टूटने की आशंका जताई जा रही है।
पर्यावरण का मुद्दा:
सबसे गंभीर बात यह है कि इस निर्माण कार्य के लिए लगभग 60 गांठ परस्मानिया के जंगलों में अवैध तरीके से खुदाई की गई है।
जंगलों में भारी मशीनों की आवाजाही से पेड़-पौधों, वन्यजीवों और प्राकृतिक संतुलन को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
खनन माफिया पर सवाल:
सूत्र बताते हैं कि क्षेत्र में दो बड़े खननकर्ता सक्रिय हैं, जिन पर बिना वैध अनुमति के पत्थर उत्खनन का आरोप है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले में राजस्व विभाग और खनन विभाग की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीणों की आवाज:
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है—
“अगर सड़क 140 करोड़ की है, तो गुणवत्ता भी उसी स्तर की होनी चाहिए। लेकिन यहां तो जंगल उजाड़कर घटिया पत्थर डाला जा रहा है।”
सवाल जो प्रशासन से पूछे जाने चाहिए:
सड़क निर्माण में प्रयुक्त पत्थर की गुणवत्ता की जांच कब और किसने की?
जंगल क्षेत्र में खनन की अनुमति किस आधार पर दी गई?
60 गांठ जंगल प्रभावित होने के बाद भी वन विभाग मौन क्यों है?
क्या राजस्व और खनन अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी?
यदि सड़क समय से पहले खराब हुई, तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
मांग:
अब ज़रूरत है किउच्च स्तरीय जांच कराई जाएसड़क निर्माण का थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट होदोषी ठेकेदार, खननकर्ता और अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए
और पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई कराई जाएसवाल यह है कि क्या जनता के 140 करोड़ रुपये यूँ ही मिट्टी और घटिया पत्थरों में मिल जाएंगे?अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब तक आंखें खोलता है।

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