किसानों के हक पर डाका और सरकारी व्यवस्था में खुला भ्रष्टाचार

 chief editor -Neeraj pandey 

किसानों के हक पर डाका और सरकारी व्यवस्था में खुला भ्रष्टाचार किसान रघुवीर सिंह ने सुनाई अपनी व्यथा


एक ऐसा मामला सामने आया है जो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।



मध्यप्रदेश के करेला धान खरीदी केंद्र में किसानों से खुलेआम लूट और अवैध वसूली का मामला सामने आया है।

धान खरीदी केंद्र का संचालन कर रहे शारदा सहायता समूह के प्रभारी पुष्पेंद्र त्रिपाठी पर किसानों से 18 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से अवैध तोलाई शुल्क वसूलने का गंभीर आरोप लग रहा है

स्थानीय किसानों का कहना है कि केंद्र पर इस समय लगभग 40,250 कि जगह 41200 की  धान की तोल चल रही है, और हर किसान से जबरन  18 रुपये प्रति क्विंटल की रकम वसूली जा रही है।

यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो यह वसूली लाखों रुपये तक पहुंचती होगी जो सीधे-सीधे सरकारी नियमों का उल्लंघन है।

किसानों का आरोप है कि अगर वे यह अवैध राशि नहीं देते, तोउनकी धान की तोल में देरी की जाती है

टोकन रोक दिए जाते हैं

और कई बार खरीदी ही नहीं की जाती

यह पूरा मामला अति भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुका है, जहां गरीब किसानों को मजबूरी में रिश्वत देनी पड़ रही है।

सवाल यह है कि:

क्या प्रशासन को इस अवैध वसूली की जानकारी नहीं है?

क्या जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं?

और क्या किसानों को उनका हक दिलाया जाएगा या यूँ ही लूटा जाता रहेगा?

किसान अब इस मामले में कलेक्टर और खाद्य विभाग से जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर भ्रष्टाचार पर कब तक कार्रवाई करता है, या फिर किसानों की मेहनत की कमाई इसी तरह लूटी जाती रहेगी।

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