देवगांव विपणन केंद्र पर लगा फर्जी पंजीयन का आरोप
देवगांव विपणन केंद्र पर लगा फर्जी पंजीयन का आरोप
23–24 हेक्टेयर (लगभग 60 एकड़) भूमि पर कूटरचित पंजीयन,
अपुस्ट सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार देवगांव विपणन केंद्र से जुड़ा एक ताज़ा मामला अब सामने आया है, जो हाल ही में दर्ज हुई एफआईआर से कहीं अधिक बड़ा और संगीन बताया जा रहा है। मामला देवगांव विपणन केंद्र के ऑपरेटर एवं ग्राम मढ़िया (सैदा) निवासी मुकेश पिता ब्रजलाल लोधी से जुड़ा है, जिस पर अब व्यापक फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, अब तक सामने आए मामलों में केवल नाम का दुरुपयोग कर पंजीयन कराए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन इस बार आरोप इससे कहीं आगे बढ़ गए हैं। सूत्रों का दावा है कि मुकेश लोधी ने दूरस्थ गांव गोदाना के ऐसे लोगों की कृषि भूमि का भी पंजीयन करवा लिया, जिनसे उसका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है और जिन्हें इस कथित पंजीयन की जानकारी तक नहीं थी।
बताया जा रहा है कि यह पंजीयन पूरी तरह फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर कराया गया है। प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, करीब 23 से 24 हेक्टेयर (लगभग 60 एकड़) कृषि भूमि को फर्जी तरीके से पंजीकृत किया गया, जो शासन के रिकॉर्ड और कृषि उपार्जन प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रशासनिक मिलीभगत की आशंका
इतनी बड़ी मात्रा में भूमि का पंजीयन बिना स्थानीय सत्यापन, बिना भू-स्वामी की सहमति और बिना उचित जांच के कैसे संभव हुआ—यह सवाल अब प्रशासनिक तंत्र पर भी उंगलियां उठा रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते गहन जांच नहीं हुई, तो यह घोटाला और भी बड़े स्तर पर फैल सकता है।
कानूनी विशेषज्ञ की राय
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (जालसाजी व कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग) के साथ-साथ राजस्व अभिलेखों में हेरफेर की श्रेणी में आता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसमें कठोर दंड और संपत्ति की कुर्की तक की कार्रवाई संभव है।
मांग
स्थानीय किसानों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि—
पूरे पंजीयन प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
फर्जी पंजीयन तत्काल निरस्त किए जाएं
दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो
विपणन केंद्रों के पंजीयन सिस्टम की ऑडिट कराई जाए
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है, या यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
यह एक खोजी रिपोर्ट है इस पर जाँच होनी चाहिये यह जानकारी अपुस्ट सूत्रो से मिली है

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